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Showing posts from March, 2020

महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा- दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह सबसे बड़ा संकट, राजनीतिक खेल भूलकर सभी देश साथ आएं 

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संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि कोरोना दूसरे युद्ध के बाद सबसे बड़ा चुनौतिपूर्ण संकट है। उन्होंने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि कोरोना से दुनिया में हर किसी को खतरा है। इसका अर्थव्यवस्था परअसर पड़ रहा है, जिससे मंदी आएगी। शायद हाल के बीते समय में ऐसी कोई समस्या पैदा नहीं हुई है। इससे अस्थिरता, अशांति और संघर्ष बढ़ा रहा है। इन तथ्यों पर गौर करें तो हमें यकीन हो जाएगा कि यह महामारी वाकई दूसरे विश्वयुद्ध के बाद दूसरी सबसे बड़ी चुनौती है। गुटेरेस ने कहा कि कोरोना से मजबूती और असरकारी ढ़ंग से निपटने की जरूरत है। ऐसा तब संभव होगा जब सभी देश राजनीति खेल भूलकर एक साथ आएं और यह समझें कि इससे मानवता को खतरा है। महामारी को लेकर दुनिया के नेताओं के संपर्क में हूं: गुटेरेस यूएन प्रमुख ने कहा कि वह महामारी को लेकर दुनिया के नेताओं के संपर्क में हैं। इस बात को लेकर एकमत बन रहा है कि हम सभी एक साथ इस बीमारी की चपेट में हैं और हमें इससे साथ मिलकर ही बाहर निकलना होगा। हालांकि समस्या यह है कि इसका प्रैक्टिकल तरीका क्या होगा। इससे निपटने के लिए तेजी से का

42 हजार से ज्यादा मौतें: अमेरिका में 24 घंटे में 770 लोगों की जान गई; ट्रम्प ने कहा- आने वाले 2 हफ्ते बेहद दर्दभरे होंगे

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दुनियाभर में कोरोनावायरस से आठ लाख 58 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। अब तक 42 हजार 140 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, एक लाख 77 हजार 141 व्यक्ति स्वस्थ भी हुए हैं। उधर, अमेरिका में एक दिन में 770 लोगों की जान गई है। यहां अब तक तीन हजार 889 लोगों की मौत हो चुकी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को कहा कि अमेरिकियों के लिए अगला दो हफ्ता बेहद दर्दभरा रहने वाला है। इसके बाद यहां स्थिति बेहतर होनी शुरू होगी। कोरोना परसंयुक्त राष्ट्र (यूएन) के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि कोरोनावायरस दुनिया के सामने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ी चुनौती है। महामारी को रोकने के लिए दुनियाभर के देशों को ज्यादा मजबूत और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। इसकी वजह से सामाजिक और आर्थिक तबाही हुई है। हम यूएन के 75 साल के इतिहास में पहली बार सबसे बड़े वैश्विक स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहे हैं। अमेरिका: ट्रम्प ने कहा- अगले 2 हफ्ते दर्दभरे ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में डेली ब्रीफिंग के दौरान कहा, ‘‘मैं चाहता हूं हर अमेरिकी आने वाले मुश्किल दिनों के लिए तैयार रहे। यह देश के लिए परीक्षा की घड़ी है। पह

यहां ऐप के जरिए लोग डॉक्टर के संपर्क में, कोरोना का शक होने पर मेडिकल टीम घर पहुंच रही

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मैड्रिड(मनीषा भल्ला). पंजाब के मशहूर लोकगायक राज ददराल के भाई प्रेम ददराल स्पेन के शहर बार्सिलोना में रहते हैं। उनका अपना रेस्त्रां है। बीते 20 दिन से बार्सिलोना में लॉकडाउन है। फोन पर प्रेम ददराल ने भास्कर को अपनी स्थिति बताई कि स्पेन की राजधानी मैड्रिड में भी लॉकडाउन है। पहले बार्सिलोना में लॉकडाउन नहीं किया गया था। लेकिन जब मैड्रिड के हालात खराब होने लगे तो यहां भी लॉकडाउन कर दिया गया। डॉक्टरऑनलाइन ऐप से पता लगा रहे कोरोना के लक्षण स्पेन सरकार ने एक ऐप बनाया है। इसके जरिये किसी को तबियतजरा भी गड़बड़ लगती है, तो वह ऑनलाइन डॉक्टरों से संपर्क करता है। उस व्यक्ति से ऑनलाइन हीलक्षण पूछकरबता दिया जाता है कि उसे कोरोना है या नहीं। अगर मेडिकल स्टाफ कोऐप के जरिये रत्ती भर भी कोरोना के लक्षण मिलते हैं, तो वे फौरन संबंधित व्यक्ति के घर पहुंचकर पूरे टेस्ट करते हैं। पूरे स्पेन में मास्क, सैनिटाइजर, दवाओं और खाने-पीने के सामान की कोई कमी नहीं है। तेजी से बढ़ रहे संक्रमित बार्सिलोना में हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। मेडिकल सुविधाओं और खाने-पीने की तो कमी नहीं है, लेकिन केस बहुत तेजी से बढ

अब रूस में सख्त लॉकडाउन, जापान 73 देशों की यात्रा पर बैन लगाएगा

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कोरोनावायरस से खुद को ब्रेफ्रिक समझनेवाले जापान और रूस भी सहम गए हैं। रूस में मंगलवार को कोविड-19 के 500 से ज्यादा मरीज मिले। यह रूस में एक दिन में अब तक की सबसे अधिक संख्या है। मॉस्को हाटस्पॉट बना हुआ है। अचानक मामले बढ़ने के बाद रूस ने एक हफ्ते के लिए लॉकडाउन और सख्त कर दिया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे एक ‘नॉन-वर्किंग वीक’ कहा है। लोगों को घरों में रहने के निर्देश दिए गए हैं। बेफिक्र थे पुतिन,लोगों से खुले आम मिला रहे थे हाथ इससे पहले राष्ट्रपति पुतिन कोरोनावायरस को लेकर बेफिक्र थे और खुलेआम लोगों से हाथ मिला रहे थे। उधर, अभी तक लॉकडाउन नहीं लगाने वाला जापान 73 देशों की यात्राओं पर रोक लगाने जा रहा है। इनमें अमेरिका, कनाडा, साउथ कोरिया भी हैं। यहां रविवार से अब तक कोरोनावायरस के केस 162% बढ़ गएहैं। दूसरी तरफ दुनियाभर में कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या आठलाख को पार कर गई है। स्पेन में 553 मौत हुई हैं। यहां 94 हजार 417 लोग पॉजिटिव मिले हैं। वहीं, इटली में एक दिन में 812 मौतें होने के बाद चार अप्रैल को खत्म होने वाला लॉकडाउन ईस्टर तक बढ़ा दिया गया है। जर्मनीः हाइजेनबर्ग को

संक्रमण रोकने में नाकाम रहने पर हुई आलोचना तो इमरान खान बोले- भारत ने लॉकडाउन कर जल्दबाजी की

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इस्लामाबाद. पाकिस्तान में कोरोनावायरस का संक्रमण रोकने में नाकाम रहने पर आलोचना झेल रहे पीएम इमरान खान ने अब कहा कि भारत ने लॉकडाउन कर जल्दबाजी की है। उन्‍होंने तंज कसतेहुए कहा क‍ि भारत में लॉकडाउन के लिए पीएम मोदी को माफी मांगनी पड़ी है। अब भारत की समस्‍या यह है कि अगर वे लॉकडाउन को खत्‍म करते हैं तो वायरस फैलेगा और अगर वे इसे जारी रखेंगे तो लोग खाने के लिए मर जाएंगे। हालांकि, इस दौरान इमरान नेवुहान में लॉकडाउन का समर्थन भी किया। पाकिस्‍तान में कोरोना वायरस का संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है। यहां 1870 से ज्यादा संक्रमित हैं, जबकि 25 की मौत हो चुकी है। जहां, दुनियाभर के देश यह मान रहे हैं कि इस वायरस का उपाय लॉकडाउन ही है तो वहीं, पाकिस्तान केपीएम इमरान खान इससे बच रहे हैं। उन्हें बिगड़ी अर्थव्‍यवस्‍था के चौपट होने का डर सता रहा है। इसके अलावा उन्हेंमुस्लिम कट्‌टर पंथियों के नाराज हो जाने का भी डर है। 27 फरवरी को पेशावर में संक्रमण की दहशत के बीच लोग जुमा की नमाज के लिए सड़कों पर इकट्‌ठा हो गए। वुहान में लॉकडाउन की तारीफ की- इमरान पाकिस्तान के पीएम इमरान ने लॉकडाउन न लगाने पर उठ

भारत समेत जिन देशों में लंबे समय से बीसीजी का टीका लग रहा, वहां लोगों में कोरोनावायरस का खतरा कम

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नई दिल्ली . कोरोनावायरस को रोकने की कोशिशों में वैज्ञानिकों को नई उम्मीद दिखाई दी है। भारत में 72 साल से बीसीजी के जिस टीके का इस्तेमाल हो रहा है, उसे दुनिया अब कोरोना से लड़ने में मददगार मान रही है। न्यूयॉर्क इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के डिपार्टमेंट ऑफ बायोमेडिकल साइंसेस की स्टडी के मुताबिक, अमेरिका औरा इटली जैसे जिन देशों में बीसीजी वैक्सीनेशन की पॉलिसी नहीं है, वहां कोरोना के मामले भी ज्यादा सामने आ रहे हैं और मौतें भी ज्यादा हो रही हैं। वहीं, जापान और ब्राजील जैसे देशों में इटली और अमेरिका के मुकाबले मौतें फिलहाल कम हैं। सबसे पहले समझते हैं कि बीसीजी क्या है? इसका पूरा नाम है बेसिलस कॉमेटी गुइरेन। यह टीबी और सांस से जुड़ी बीमारियों को राेकने में मददगार है। बीसीजी को जन्म के तुरंत बाद लगाया जाता है। दुनिया में सबसे पहले इसका 1920 में इस्तेमाल हुआ। ब्राजील जैसे देश में तभी से इस टीके का इस्तेमाल हो रहा है। कोरोना से जुड़ी स्टडी में बीसीजी का नाम कैसे सामने आया? न्यूयॉर्क इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के डिपार्टमेंट ऑफ बायोमेडिकल साइंसेस ने एक स्टडी की। बीसीजी वैक्सीनेशन और इसके कोरोना

7 लाख की आबादी वाले शहर पर खतरा, इसे बुझाने में 18 फायरफाइटर्स और एक फॉरेस्ट गार्ड समेत 19 की मौत

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बीजिंग. चीन के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत सिचुआन के शीचांग के जंगलों में लगी आग में 19 लोगों की मौत हो गई। इनमें 18 फायरफाइटर्स और एक फॉरेस्ट गार्ड शामिल था। चीनी न्यूज एजेंसी ‘शिन्हुआ’ ने स्थानीय अधिकारियों के हवाले से बताया कि आग सोमवार दाेपहर 3 बजे के बाद एक खेत में लगी थी। तेज हवाओं के कारण पास की लियांगशान पहाड़ी वाले इलाके में फैल गई। इससे शीचांग शहर के ऊपर धुएं के भारी बादल छा गए। इससे 7 लाख की आबादी वाले शहर के लिए खतरा बढ़ गया। इसे बुझाने में ही सभी की जान गई है। मृतकों की खबर मंगलवार को लगी। मृतकों की खबर मंगलवार को लगी। 1200 लोगों को बचाया मंगलवार सुबह तक आग बुझाने में 140 से ज्यादा फायरफाइटिंग इंजन, चार हेलीकॉप्टर के साथ 900 दमकल कर्मी और जवान लगे थे। 2 हजार से ज्यादा जवान बचाव ऑपरेशन में जुटे हैं। अब तक 1200 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। पिछले अप्रैल में इसी प्रान्त में मुली काउंटी के एक विशाल जंगल में आग लग गई थी। तब 700 को तैनात किया गया था जिसमें से 27 दमकलकर्मी मारे गए थे। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today तेज हवाओं के का

54 साल के व्यक्ति ने दुनिया का सबसे बड़ा रूबिक पजल बनाया, इसकी हाईट 6 फीट 7 इंच है

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लंदन. पूर्वी इंग्लैंड के सफोक प्रदेश के इप्सविच में रहने वाले टोनी फिशर ने दुनिया का सबसे बड़ा रूबिक पजल बनाया है। इसकी हाईट 6 फीट 7 इंच है। इसे बनाने के लिए उन्होंने प्लास्टिक के पाइप और रेनफोर्स बॉक्स का इस्तेमाल किया। इस उपलब्धि के साथ ही उन्होंने अपना चार साल पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ लिया है। 2016 में उन्होंने 5 फीट 1 इंच का रूबिक पजल बनाया था। उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। स्थानीय न्यूज पेपर से बातचीत में फिशर ने कहा। मैं अपने पहले प्रयास में दो बार असफल हुआ था। बचपन से ही मैं गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से प्यार करता था। इसके लिए मैं तेज दौड़ने से लेकर पहाड़ पर चढ़ने के लिए भी तैयार था।यह मेरा सपना था जो पूरा हो गया। हालांकि इसमें मुझे सालों को वक्त लगा। रूबिक क्यूब बनाने के लिए मैं 1980 से तैयार कर रहा था। यह सामान्य रूबिक की तरह 90 डिग्री पर घूमता है। बचपन से ही मैं गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से प्यार करता था, इसके लिए कुछ भी करने को तैयार था। रूबिक पजल में एआई से हारा इंसान कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में पिछले साल एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम तैयार किया था, ज

विजय माल्या ने लॉकडाउन के बहाने सरकार से मदद मांगी, एक बार फिर कर्ज चुकाने का ऑफर दिया

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लंदन. भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या (63) ने लॉकडाउन के बहाने सरकार से मदद मांगी है। माल्या ने एक बार फिर किंगफिशर एयरलाइंस का पूरा कर्ज चुकाने का ऑफर दिया है। उसने उम्मीद जताई है कि संकट की इस घड़ी में वित्त मंत्री उसकी बात सुनेंगी। माल्या ने मंगलवार सुबह ट्वीट कर कहा कि भारत सरकार ने लॉकडाउन कर बहुत अच्छा फैसला लिया है। मेरी सभी कंपनियों में काम बंद है। लेकिन, हम कर्मचारियों को घर नहीं भेज रहे और उनका खर्च उठा रहे हैं। ऐसे में सरकार को मदद करनी चाहिए। माल्या ने कहा- बैंक पैसे लेने को तैयार नहीं माल्या मार्च 2016 में लंदन भाग गया था। उसकी बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस पर भारतीय बैंकों के 9,000 करोड़ रुपए बकाया हैं। माल्या के प्रत्यर्पण का केस चल रहा है। वह पहले भी कई बार कर्ज चुकाने का ऑफर दे चुका है। इस बार भी कहा है कि ना तो बैंक पैसे लेने को तैयार हैं, ना ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अटैच प्रॉपर्टी रिलीज करना चाहता है। ## कोरोना से बचने के लिए घर में रहें माल्या ने लॉकडाउन को गंभीरता से लेने का मैसेज भी दिया है। उसने कहा है कि सुरक्षित रहना और सोशल डिस्टेन्सिंग अहम है। घर

ब्रिटेन में लॉकडाउन के बावजूद नीली झील देखने पहुंच रहे थे लोग, पुलिस ने काली डाई घोल दी

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लंदन. दुनियाभर में कोरोनावायरस के संक्रमण की रफ्तार थामने के लिए लॉकडाउन घोषित किया गया है। कोशिश की जा रही है कि लोग कम से कम घरों से निकलें,जिससे संक्रमण को रोका जा सके। ब्रिटेन में भी लॉकडाउन घोषित किया गया है, लेकिन यहां भी लोग नियमों का पालन नहीं कर रहे। लंदन से 170 किलोमीटर दूसर बक्सटन की हर्पर हिल में नीली झील को देखने के लिए लोग लगातार पहुंच रहे थे। अब यहां की पुलिस ने भीड़ को कम करने के लिए झील में काली डाई घोल दी है। इस झील का नाम ब्लू लैगून है। बक्सटन पुलिस ने 25 मार्च को एक फेसबुक पोस्ट में लिखा, ‘‘हमें पता चला था कि लोग ब्लू लैगून झील में इकट्‌ठा हो रहे हैं। इस पर हम वहां पहुंचे और झील में काले रंग की डाई दाल दी, ताकि यह लोगों को कम सुंदर लगे।’’ बिट्रेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने पिछले सोमवार को देश में लॉकडाउन घोषित किया था। लोगों से घरों में रहने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि अगर आप नियम नहीं मानेंगे तो पुलिस कड़े कदम भी उठा सकती है। ब्लू लैगून का नीला पानी इसकी खासियत है। इसी वजह से यहां इंस्टाग्रामर्स सेल्फी लेने के लिए जुटते हैं। झील के पानी में जहरीले क

अमेरिकी फार्मा कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन अगले साल तक इसे तैयार कर सकती है, इंसानों पर ट्रायल की तैयारी शुरू

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वॉशिंगटन. अमेरिकी फार्मा कंपनीजॉनसन एंड जॉनसन (जे एंड जे) अगले साल तक कोरोना का टीका तैयार कर सकतीहै। इसे इमरजेंसी में उपयोग किया जा सकेगा। कंपनी ने सोमवार को बताया कि इसके लिए एक उपयुक्त कैंडिडेट वैक्सिन वायरस चुन लिया गया है। ऐसे में अब इंसानों पर इसके ट्रायल की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस काम पर 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 100 करोड़ रुपए)का निवेश किया जाएगा। जे एंड जे ने इसके लिए अमेरिकी सरकार के बायोमेडिकल रिसर्च डेवलपमेंट अथॉरिटी के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। कैंडिडेट वैक्सिन (सीवी) एक तरह का इंफ्लूएंजा वायरस होता है। इसे लैब में तैयार किया जाता है। इसका कई चरणों में ट्रायल किया जाता है। इंसानों से पहले जानवरों पर इसका ट्रायल होता है।असरकारी होने पर वैक्सिन निर्माता टीका तैयार करने के लिए है तो इसका उपयोग करते हैं। जनवरी में ही टीका तैयार करने का काम शुरू हो गया था कंपनी के चीफ साइंटिफिक ऑफिसर पॉल स्टोफेल्स बताया कि जनवरी में ही इस पर काम शुरू कर दिया गया था। कोरोना का टीका तैयार करने के लिए इबोला वायरस टीका बनाने के लिए अपनाई गई तकनीक इस्तेमाल की जाएगी। स्टोफेल्स ने बता

मानव समाज से हाथ मिलाना और गले मिलना खत्म हो जाएगा, इस व्यवहार से भावनाओं को ज्यादा खतरा

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लंदन. दुनिया में तेजी से फैल रही महामारी के कारण लोगों में सोशल डिस्टेंस बढ़ रहा है। लोग एक दूसरे के पास जाने के बच रहे हैं। हाथ मिलाना और पब्लिकली गले मिलना अभी लगभग बंद ही है। लोगों के इस बदलते व्यवहार को लेकर वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले कुछ सालों के बाद मानव समाज से हाथ मिलाना और गले मिलने जैसी सामाजिक परंपराएं विलुप्त हो जाएंगी। डेलिगेशन, बिजनेस मीटिंग और कॉन्फ्रेंस में लंबे समय तक हाथ मिलाते रहने वाले राजनीतिज्ञ और कारोबारी इसकी जगह दूसरे विकल्प तलाशेंगे। शरीर पर मौजूद वायरस को मारने और कपड़ों के साथ-साथ आसपास की चीजों की सतहों को साफ करने पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। इससे सैनिटाइज जैसे पदार्थों की बिक्री बढ़ेगी और वे महंगे भी होंगे। 6 महीने बाद ही हम इसे आदत बना लेंगे नॉटिंघम ट्रेंट यूनिवर्सिटी में सामाजिक विज्ञान के प्रोफेसर रॉबर्ट डिंगवाल के मुताबिक, ‘‘यूके में 6 महीने या उससे ज्यादा समय के लिए सोशल डिस्टेंस को बनाए रखा जा सकता है। इसके बाद ये आदतें हमारी दिनचर्या में शामिल हो जाएंगी। फिर हमारा ध्यान लंबे समय तक हाथ मिलाने से ज्यादा देर तक हाथ धोने में रहेगा।’’ 6 त

37 हजार 797 मौतें: वॉशिंगटन में घर में रहने के आदेश, उल्लंघन करने पर 3.7 लाख रुपए जुर्माना; ट्रम्प ने कहा- अब तक 10 लाख लोगों का टेस्ट हुआ

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वॉशिंगटन/रोम . दुनियाभर में कोरोनावायरस के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। 199 देशों में करीब सात लाख 85 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। अब तक 37 हजार 797 मौतें हो चुकी हैं। वहीं, एक लाख 65 हजार 387 व्यक्ति ठीक भी हुए हैं। उधर, सबसे ज्यादा संक्रमण के एक लाख 64 हजार 121 मामले अमेरिका में सामने आए हैं। यहां तीन हजार 163 लोगों की जान जा चुकी है। वॉशिंगटन में लोगों को घर में ही रहने के आदेश जारी किए गए हैं। इसका उल्लंघन करने पर करीब 3.7 लाख जुर्माना (पांच हजार डॉलर), 90 दिन जेल या फिर दोनों ही हो सकती है। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को कहा कि किसी भी अन्य देश की तुलना मेंयहांअब तक 10 लाख लोगों मेंकोरोना की जांच की जा चुकी है। वहीं, अमेरिका के स्वास्थ्य मंत्री एलेक्स अजार ने कहा कि हर दिन हम एक लाख सैम्पलकी जांच कर रहे हैं। कोलंबिया जिले की मेयर मुरियल बोसर ने सोमवार को ट्वीट किया, “कोरोनावायरस के मामलों में वृद्धि हो रही, इस वजह से मैं कोलंबिया जिले के लिए घर में रहने का आदेश जारी कर रही हूं। लोगों को केवल जरूरी कामों जैसे चिकित्सा, भोजन, जरूरी सामान लाने और महत्वपूर्ण काम के ल

वुहान के लोगों ने कहा- यहां 3200 नहीं, 42 हजार मौतें, रोजाना 3500 अस्थि कलश दिए जा रहे

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वुहान . चीन के वुहान से दुनियाभर में कोरोनावायरस फैला था। ब्रिटिश वेबसाइट डेली मेल के मुताबिक, वुहान के स्थानीय लोगों को कहना है कि यहां पर 42 हजार लोगों की मौत कोरोनावायरस की वजह से हुई है। यह चीन के दावे से 10 गुना ज्यादा है। चीन के आंकड़ों के मुताबिक इस वायरस से करीब 81 हजार लोग संक्रमित हुए हैं। 3300 जानें गईं। वुहान के सात शवदाह गृहों से हर रोज 500-500 अस्थि कलश मृतकों के परिजनों को भेजे जा रहे हैं। 12 दिन चलेगा सिलसिला हर दिन 3500 लोगों को अस्थि कलश भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक हांकू, वुचांग और हनयांग में लोगों को कहा गया है कि उन्हें 5 अप्रैल तक उनके परिजनों के अस्थि कलश दे दिए जाएंगे। इसी दिन यहां किंग मिंग महोत्सव शुरू होने जा रहा है, जिसमें लोग अपने पूर्वजों की कब्र पर जाते हैं। यानी अस्थि कलश भेजने का यह सिलसिला 12 दिन तक चलेगा। इस तरह से अनुमान लगाएं तो 12 दिनों में 42 हजार अस्थि कलश वितरित किए जाएंगे। कुछ कलश जिनके लेने वाले का पता ही नहीं हांकू में ही दो बार में 5 हजार अस्थि कलश दिए गए हैं। हुबेई प्रांत के जिंगझोऊ शहर के श्मशान में अस्थि कलश लावारिस पड़े हुए ह

इटली के लोगों ने ढेरों गलतियां कीं, सबको लगता था कि उन्हें कुछ नहीं होगा, एक झटके में सब बर्बाद हो गया; भारतीय यह गलती न करें

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इटली के रेड जोन कहे जाने वाले मिलान शहर से रिपोर्ट(मिलान लोम्बार्डी प्रांत की राजधानी है। इस प्रांत में 6 हजार से अधिक मौतें हो चुकी हैं।). कोरोनावायरस की वजह से इटली बर्बादी के कगार पर मुंह बाए खड़ा है। एक झटके में पूरा देश वीरान हो गया। हंसते-खेलते 11 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। 90 हजार से ज्यादा लोग अब भी जिंदगी और मौत के बीच हांफती सांसों के साथ झूल रहे हैं। मिलान शहर इटली के उस लोम्बार्डी प्रांत की राजधानी है जहां महज 37 दिनों में सबसे ज्यादा 6 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। उसी मिलान से भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट... इटली में लॉकडाउन होते ही लोग ट्रेनों में भरकर दूसरी जगहों को भागे, पूरे देश में फैल गया संक्रमण इटली में कोरोनावायरस काफी तेजी से फैला। अभी शनिवार को ही एक दिन में 969 लोगों की मौत हो गई। मुझे याद है, जब थोड़े बहुत केस सामने आए थे। खासतौर पर लोम्बार्डी और मिलान में। तब सरकार ने लोगों को घरों में रहने की सलाह दी थी। सभी को आइसोलेट होने के लिए कहा था। उस वक्त कोई ऑफिशियल लॉकडाउन नहीं हुआ था। पर लोगों ने इसे हल्के में ले लिया। जब इसकी वजह से मौतें होने लगीं

राष्ट्रपति चुनाव पर कोरोना का असर, ब्रिटेन की तर्ज पर डेढ़ महीने का हो सकता है चुनाव,ऑनलाइन हो रहा है प्रचार

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वाॅशिंगटन. काेराेना महामारी का असर अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावाें पर पड़ रहा है। डेलीगेट्स के चुनाव महामारी की वजह से टल गए हैं। पार्टियाें की रैलियां भी नहीं हाे पा रही हैं। उम्मीदवार चुनाव प्रचार की जगह अब लाेगाें की मदद में जुटे हैं। वे नेता कम, समाजसेवी के रूप में ज्यादा सक्रिय हैं। व्हाइट हाउस से लेकर काउंटी काेर्टहाउस तक काेराेना ने चुनाव की पूरी प्रक्रिया काे ही एक तरह से उलट कर रख दिया है। राष्ट्रपति के लिए चुनाव इसी साल नवंबर में हाेने वाले हैं। इसके लिए प्रचार 20 महीने पहले शुरू हाे जाता है। जबकि अब सिर्फ 218 दिन ही बचे हैं। लेकिन इस बार यह ब्रिटेन में प्रधानमंत्री के चुनाव की तरह डेढ़ महीने का हाे सकता है। काेराेना तय करेगा ट्रम्प का कार्यक्रम डेमाेक्रेटिक पार्टी का कन्वेंशन जुलाई में हाेना है, लेकिन पार्टी नेताओंकाे इस पर संदेह है। उन्हें लगता है काेराेना का संक्रमण ऐसा ही रहा ताे पार्टी कन्वेंशन तय समय पर हाेना मुश्किल है। वहीं, राष्ट्रपति ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी का कन्वेंशन काेराेना बीमारी की स्थिति से तय हाेगा। महामारी काे देखते हुए चुनाव लड़ने वाले कांग्रेस, प्रांती

बेलारूस के राष्ट्रपति बोले- हमें कोरोना का खौफ नहीं, देश के लोग वोदका पिएं और साउना बाथ लें

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मिंस्क. कोरोनावायरस दुनिया में अब तक 35 हजार से ज्यादा लोगों को मौत की नींद सुला चुका है। हर मुल्क इससे खौफजदा है। बचने के कड़े उपाय कर रहे हैं। लेकिन, बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको बेफिक्र हैं। उनके देश में संक्रमण से बचने के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। खचाखच भरे स्टेडियम में फुटबॉल और आईस हॉकी खेली जा रही है। लुकाशेंको के मुताबिक- बेलारूस में कोरोना का कोई खतरा नहीं है। लोगों को वोदका पीना चाहिए और साउना बाथ लेना चाहिए। खड़े होकर जान जाए तो बेहतर सोवियत संघ के विघटन के बाद बेलारूस का गठन हुआ था। आबादी करीब 90 लाख है। लुकाशेंको 1994 से सत्ता में हैं। यहां 92 लोग संक्रमित भी पाए जा चुके हैं। लेकिन, राष्ट्रपति बेफिक्र नजर आते हैं। पिछले दिनों उन्होंने खुद एक आईस हॉकी मैच में हिस्सा लिया। इसके बाद मीडिया से बातचीत की। कहा, “घुटनों के बल चलकर जिंदगी गुजारने से बेहतर है, पैरों पर खड़े होकर मर जाना। आपको यहां कोई वायरस उड़ता नजर आ रहा है? मुझे तो नहीं दिखता।” मिंस्क में पिछले दिनों एक फुटबॉल मैच के दौरान मौजूद दर्शक। और सुझाव भी... लुकाशेंको ने आगे कहा, “खेल वायरस से नि