15 करोड़ की आबादी वाले रूस में सिर्फ 495 कोरोना संक्रमित, 6 लाख जनसंख्या वाले लग्जमबर्ग में यह आंकड़ा 8 मौतों के साथ 1100; पुतिन की रणनीति कारगर रही

मॉस्को. कोरोनावायरस ने दुनिया के सामने बहुत बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। हर देश इससे जूझ रहा है। चीन, अमेरिका और इटली समेत कुछ मुल्क ऐसे हैं, जो साधन संपन्न होते हुए भी संक्रमण नहीं रोक पाए। वहीं, रूस जैसे देश भी हैं, जिन्होंने वक्त रहते उपाय किएऔर महामारी को बहुत हद तक काबू में रखा। इस कामयाबी के पीछे राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का पूर्वानुमान और रणनीति हैं। साथ ही देश के लोगों का भरपूर सहयोग भी।

रूस बनाम लग्जमबर्ग
एक छोटी सी तुलना। रूस की आबादी करीब 15 करोड़ है। यहां मंगलवार रात तक संक्रमण के कुल 495 मामले सामने आए। एक मरीज की मौत हुई। लग्जमबर्ग की जनसंख्या 6 लाख 28 हजार है। यहां इसी दौरान 1100 मामले दर्ज हुए। 8 लोगों की मौत हुई। दोनों देशों की जलवायु लगभग एक जैसी है। सवाल ये है कि रूस क्यों संक्रमण को काबू में रख पायाऔर लग्जमबर्ग या इटली जैसे देश क्यों महामारी के दंश से कराह रहे हैं?

आहट और तैयारी
सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन और उनके अफसरों ने संक्रमण से निपटने की जो रणनीति बनाई, वो कारगर साबित हुई। रूस की 2600 मील लंबी सीमा चीन से लगती है। कोरोनावायरस चीन के वुहान से ही शुरू हुआ। रूस सरकार को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, उसने कदम उठाने शुरू कर दिए। चीन बॉर्डर को सख्ती से सील किया गया। दोनों देशों की रिश्ते बेहतर हैं लेकिन रूस ने चीन की नाराजगी की परवाह नहीं की।

टेस्ट, टेस्ट और टेस्ट
डॉक्टर मेल्तिया वुजोविक रूस में डब्लूएचओ की रिप्रेजेंटेटिव हैं। उनके मुताबिक, “सच्चाई ये है कि रूस ने जनवरी में ही खतरा पढ़ लिया था। निपटने की तैयारी भी कर ली। उसने तीन काम किए। पहला- हर संदिग्ध का टेस्ट और पहचान। दूसरा- संदिग्ध के संपर्क में आने वालों की पुख्ता पहचान। तीसरा- आईसोलेशन। इन तीनों चरणों में क्वॉलिटी कंट्रोल मेंटेन किया गया। सोशल डिस्टैंशिंग बेहद जरूरी थी। इसे सख्ती से लागू किया गया।”

अमेरिका देर से जागा
रूस के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 21 मार्च तक 1 लाख 56 हजार संदिग्धों के टेस्ट किए जा चुके थे। इनमें से कुछ के तो दो या तीन बार भी टेस्ट हुए। वहीं, अमेरिका ने मार्च की शुरुआत में तेजी दिखाई। रूस के हर एयरपोर्ट पर फरवरी की शुरुआत से ही चीन, ईरान, दक्षिण कोरिया या यूरोप से आने यात्रियों की सघन जांच की गई। जो संदिग्ध मिले उन्हें फौरन क्वारैन्टाइन किया गया।

रूस पर एक शक भी
एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस भले ही दावा करता हो कि उसके यहां हालात काबू में हैं। लेकिन, इस पर थोड़े शक की गुंजाइश है। दरअसल, चेरनोबिल परमाणु हादसा (1986) और 1980 के दशक में एचआईवी संक्रमण जैसे मामलों को लेकर ये कहा जाता है कि रूस ने सही आंकड़े नहीं बताए थे। फरवरी में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हुई। इसमें दावा किया गया कि रूस में 20 हजार कोरोना संक्रमित हैं। लेकिन, इस पर यकीन करना मुश्किल है। पुतिन सरकार ने जागरूकता प्रसार के लिए सोशल मीडिया का जमकर उपयोग किया। इसका फायदा हुआ।



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रूस ने जनवरी के आखिर में ही कोरोना संक्रमण से निपटने की तैयारी कर ली थी। (प्रतीकात्मक चित्र)


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