एक महीने पहले चीन में रोज कोरोना के 1500 से 1900 केस आ रहे थे और 200 मौतें हो रही थीं, पर पिछले 24 घंटे में सिर्फ 11 केस आए और 13 मौतें हुईं

भास्कर रिपोर्ट(नई दिल्ली/बीजिंग). उस वक्त जब दुनिया के ज्यादातर देश कोरोनावायरस से या तो जूझ रहे हैं या फिर बचने के तरीके ढूंढ रहे हैं, तब चीन में जिंदगी दोबारा पटरी पर लौट रही है। क्योंकि चीन ने कोरोना पर काफी हद तक काबू पा लिया है। कोरोना पर काबू पाने के लिए चीन ने पहले धड़ाधड़ नए अस्पताल बनाए, उसके बाद जिस वुहार शहर और हुबेई प्रांत से यह वायरस फैलना शुरू हुआ, उसे पूरी तरह लॉकडाउन(लोगों के घर से बाहर निकलने पर रोक) कर दिया। सोशल मीडिया ऐपस के जरिए लोगों को बताया कि किन जगहों पर जाएं, कहां न जाएं। इसका असर दिखने भी लगा है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक 16 फरवरी को चीन में करीब 1900 कोरोना केस आए थे और 200 से ज्यादा मौतें हुई थीं। पिछले 24 घंटे में चीन में कोरोना के सिर्फ 11 केस ही सामने आए हैं, 13 मौतें हुई हैं। चीन में अब दुनिया के करीब 15 देशों से कम कोरोना केस सामने आ रहे हैं। धीरे-धीरे लोग एक बार फिर कामकाज पर लौटना शुरू हो गए हैं।

जिनपिंग कोरोना वायरस शुरू होने के बाद पहली बार वुहान पहुंचे

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वायरस फैलने के बाद पहली बार वुहान का दौरा भी किया है। उन्होंने अस्पतालों और ऑफिसों का दौरा किया।

चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने वुहान में रोजमर्रा के सामान बेंचने वालों से मुलाकात की

चीन में कोरोना के कम होते केस, इसकी जद में आ चुके देशों के लिए केस स्टडी का विषय बन गया है कि कैसे इस पर नियंत्रण पाया जाए। चीन में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के चीफ रिप्रजेंटेटिव अधिकारी डेविड ऐकमैन कहते हैं कि शी जिनपिंग सरकार ने दुनिया के तमाम देशों को आईना दिखाया है कि कैसे कड़े फैसलों से हर मुश्किल को आसान बनाया जा सकता है, बशर्ते इच्छाशक्ति और गुड-गवर्नेंस होनी चाहिए। चीन ने इस वायरस को देश के अन्य हिस्सों में फैलने से रोकने के लिए गजब का काम किया है। सरकार ने अर्थव्यवस्था को दोबारा रफ्तार देने और लोगों के स्वास्थ्य को सुरक्षा देने के दिशा में भी शानदार संतुलन बनाया है। मुझे लगता है कि दुनिया के अन्य बहुत से देशों को चीन के अनुभव से सीखना चाहिए। ताकि कोरोना को समय रहते रोका जा सके।'

वुहान में कोरोनावायरस के इलाज के लिए बनाया गया अस्पताल।


चीन ने इन चार फैसलों से कोरोना को अन्य हिस्सों में फैलने से रोका

लॉकडाउन: 23 जनवरी को हुबेई प्रांत के वुहान समेत 15 शहरों को कोरोनावायरस फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन कर दिया गया। इससे 5 करोड़ से ज्यादा लोग यहां के घरों में कैद हो गए। लोगों की मदद के लिए चीन के अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मी गए। एक सप्ताह में यहां दो नए अस्पताल बनाए गए, ताकि कोरोना पीड़ित लोगों का इलाज हो सके।

कम्युनिटी सर्विस के कर्मचारी वुहान में लोगों को सब्जी की होम डिलीवरी कर रहे हैं।

ट्रांसपोर्ट पर रोक: पब्लिक ट्रांसपोर्ट सर्विस पूरी तरह से बंद कर दिया। इनमें बस, ट्रेन, फ्लाइट्स, फेरी सेवा शामिल हैं। वुहान एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन ओर मेट्रो ट्रांजिट सिस्टम को भी बंद कर दिया। प्रशासन की अनुमति के बिना कोई भी शहर से बाहर नहीं जा सकता है।

वुहान में झील के किनारे साइकिलिंग करते स्वास्थ्यकर्मी।

ऑफिसों और स्कूलों में बंदी: कुछ दिनों के अंदर ही फैक्टरियों, ऑफिसों, स्कूलों को भी बंद कर कर दिया गया। साथ ही प्रशासन ने कुछ बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट्स का इस्तेमाल लोगों की निगरानी करने के लिए शुरू किया। लोगों के मोबाइल पर ग्रीन, येलो और रेड ट्रैफिक लाइट सिस्टम दे दिया, ताकि वे यदि रेलवे स्टेशन या चेक प्वाइंट्स की ओर निकलते हैं, तो उन्हें अलर्ट भेजा जा सके।

वुहान के अस्पताल में काम करते हेल्थ वर्कर।

आम नागरिकों का सहयोग: प्रशासन के हर कदम में मदद की, भीड़ वाले इलाकों में खुद ही जाना बंद किया
डेविड ऐकमैन कहते हैं कि चीन द्वारा वायरस के फैलने से रोकने के लिए उठाए गए कुछ कदम काफी कारगर रहे हैं, इनमें वर्क फ्राम होम, स्कूलों को बंद करना, किसी जगह पर भीड़ को जमा होने से रोकना आदि शामिल हैं। इसके अलावा आम नागरिकों द्वारा उठाए गए कदम भी काफी अहम हैं, लोगों ने नियमित हाथ धुलना शुरू किया, खुद ही यात्रा भी बंद कर दी और स्वास्थ्य विभाग पर जबरदस्ती का दबाव बनाना छोड़ दिया। आम लोगों के इस सहयोग से प्रशासन को वायरस फैलने रोकने में काफी मदद मिली है।

बीजिंग स्थित एक मास्क फैक्टरी में काम करते वर्कर।

जिसने चीन से सीखा: सिंगापुर में कोरोना केस के बढ़ने की दर से ज्यादा मरीज ठीक हो रहे हैं
चीन सिर्फ अकेला देश नहीं है, जिसने कोरोनावायरस पर तुरंत काबू पाने में कामयाबी हासिल की है। सिंगापुर ने भी कोरोना को रोकने के लिए बिना कोई देरी किए, कई अहम कदम उठाए हैं। जिसके चलते वहां अब तक सिर्फ 150 कोरोना केस ही सामने आए। वायरस के फैलने की दर से िरकवरी दर से ज्यादा बेहतर है। इसलिए अब तक 93 लोग पूरी तरह से स्वस्थ हो गए हैं, उन्हें अस्पताल से वापस भेज दिया गया है। प्रशासन ने इसके लिए देश के सभी प्रमुख जगहों पर ट्रैकिंग प्वाइंट्स बना दिए हैं। प्रभावित देशों से आने वाले नागरिकों को अलग-थलग रखा जा रहा है। फरवरी में स्वास्थ्य मंत्रालय ने दो नागरिकों पर यात्रा की जानकारी नहीं देने पर फाइन भी लगा दी थी। ऐसे अपराधों के लिए देश में 7000 हजार डॉलर फाइन और छह महीने की सजा का भी प्रावधान है।


बड़ी बात: गोल्डमैन सॉक्स के पूर्व अधिकारी ने कहा- भगवान का शुक्र है कि कोरोनावायरस भारत से नहीं, चीन से शुरू हुआ
गोल्ड मैन सॉक्स के पूर्व चीफ इकोनॉमिस्ट जिम ओ नेल ने कहा है कि भगवान का शुक्र है कि कोरोनावायरस चीन से शुरू हुआ, भारत जैसे देश से नहीं शुरू हुआ। क्योंकि भारतीय सरकार की व्यवस्थाओं को देखते हुए वहां ऐसा कोई रास्ता नहीं है, जिससे कोरोनावायरस को रोका जा सके। जैसा कि चीन ने कर दिखाया। यह चीन का बहुत ही शानदार मॉडल है, ऐसा ही कुछ ब्राजील के बारे में कह सकते हैं।


चीन में कोरोना का ग्राफ: 84% केस अकेले हुबई प्रांत में आए हैं, 96% मौतें भी इसी प्रांत में हुई हैं
चीन में कोरोनावायरस के 80,824 केस अब तक आए हैं, जबकि 3,189 लोगों की जान जा चुकी है। 80,824 केसों में करीब 84% केस अकेले चीन के हुबई प्रांत से आए हैं। 96% मौतें भी इसी प्रांत में हुई हैं। देश में 65,541 केस रिकवर हो गए हैं। यह सभी मौतें हुबेई में हुई हैं। चीन में रोजाना औसतन 412 मरीज ठीक हो रहे हैं।

दुनिया का ग्राफ: 10 में से 7 केस चीन से बाहर के आ रहे हैं
कोरोना के 10 में से 7 केस चीन से बाहर के आ रहे हैं। चीन के बाहर सबसे खराब स्थिति यूरोप की है। यूरोप में 35000 हजार से ज्यादा केस सामने आए हैं। शुक्रवार सुबह तक इटली में 15,113 केस सामने आ चुके हैं। फ्रांस में 24 घंटे में 800 केस सामने आए हैं।

चीन और यूरोप से बाहर किस देश में कितने वायरस आए
दुनिया 122 देशों मेें अब तक कोरोनावायरस के 143,600 लाख केस सामने आए हैं। जबकि 5,406 लोगों की मौत हुई है। इनमें से 2,217 मौतें चीन के बाहर हुई हैं।



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