कभी 72 दिन तक बर्फीली पहाड़ियों और 69 दिन तक खदान में फंसे लोगों ने बताया- लॉकडाउन में कैसे रहें?

नई दिल्ली.कोरोनावायरस के संक्रमण को रोकने के लिए दुनियाके कई देशों को लॉकडाउन कर दिया गया है। भारत में 21 दिन का लॉकडाउन है, जो 14 अप्रैल तक रहेगा। दुनियाभर में करोड़ों लोग घरों में कैद हो गए हैं। हालांकि, बहुत से लोग लॉकडाउन का पालन नहीं कर रहे हैं। ऐसे में दो ऐसी घटनाओं के सर्वाइवर सामने आए हैं, जो 2 महीने से ज्यादा वक्त तक विपरीत परिस्थितियों में फंसे रहने के बाद भी सुरक्षित बच गए। 1972 में एंडीज विमान दुर्घटना हो या 5 अगस्त 2010 में चिली में खदान ढहना।इन दोनों ही घटनाओं में बचे लोगों ने बताया कि लॉकडाउन में कैसे रहा जाए।

अहंकार खत्म कर बात मानें, लॉकडाउन बहुत आसान

12 अक्टूबर 1972:एंडीज की बर्फीली चोटियों में उरुग्वे की रग्बी टीम को लेकर जा रहा विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हादसे में 29 लोगों ने जान गंवाई थी। इनमें से प्लेन गिरते ही12 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 17 लोगों ने कुछ दिनों बाद दम तोड़ दिया था। इसी दौरान 16 लोगों ने विपरीत परिस्थितियों मेंखुद को किसी तरह बचाए रखा। फिर 72 दिन बाद उन्हें यहां से सुरक्षितनिकाला गया था।

22 दिसंबर 1972 की यह फोटो एंडीज की बर्फीली चोटियों में फंसे लोगों की है। इसी दिन 16 लोग यहां से निकाले गए थे।

हादसे में बचे 66 साल के कार्लोस पॉज ने कहा, ‘‘दोनों क्वारैंटाइन में बहुत फर्क है। पहले वाला क्वारैंटाइन जो 72 दिनों तक एंडीज पर्वतों पर हुआ था तब मैं 18 साल का था। वहां पर शून्य से 25 डिग्री सेल्सियस नीचे तापमान था। खाना या पानी के लिए किसी तरह के कोई साधन नहीं थे। हमने भूख मिटाने के लिए उन लोगों के शव खाए जो इस घटना में मर गए थे। हम टूटे प्लेन के अंदर रातें बिताते थे। अभी वाले क्वारैंटाइन में कुछ नहीं करना, केवल हाथ धोना है और घर पर रहना है। टीवी है, खाना है तो शिकायत किस बात की। हम अहंकार के खिलाफ लड़ें। विनम्र और आज्ञाकारी बनने की कोशिश करें। संदेश साफ है-घर पर रहो और अपने हाथ धोते रहो। यह कितना आसान है। मैं आज्ञाकारी बनने की कोशिश कर रहा हूं, क्योंकि मैं जीना चाहता हूं।’’

कार्लोस पॉज। (फाइल)

हर दिन कुछ हटकर करें, यह आपको बोर नहीं होने देगा

5 अगस्त 2010:चिली के अटाकामा रेगिस्तानमें एक तांबे और सोने की खदान ढह गई थी। यहां काम करने वाले 33 लोग 2 महीने से ज्यादा समय तक करीब एक किलोमीटर कीसुरंग में फंसे रहे थे। यहांशिफ्ट मैनेजर रहे लुइस उर्जुआ ने कोरोना संकट के दौरान लॉकडाउन का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘खदान में फंसने के दौरान हम काफी गंभीर स्थिति में थे। हमारे पास उस हालात से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था। हम एक-दूसरे से तरह-तरह की बाते करते थे और एक दूसरे से उनके काम सीखते थे। साथ ही प्राथना करते थे कि कि जो लोग हमें खोज रहे हैं, ईश्वरउनकी इच्छाशक्ति और ताकत बनाए रखे।’’ लुइस उर्जुआ को सबसे आखिर में 13 अक्टूबर 2010 को निकाला गया था।

लुइस उर्जुआ। (फाइल)

खदान में फंसेमारियो सेपुलवेडा ने भी लॉकडाउन के पालन की अपील करते हुए कहा, ‘‘हिम्मत न हारें, ऐसे समय में सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत जरूरी है। अपने घरों को व्यवस्थित करें, एक ही रुटीन न बनाएं, वरना आप बोर हो जाएंगे। कई ऐसी चीजें हैं, जिन्हें आप कर सकते हैं।’’

मारियो सेपुलवेडा। (फाइल)


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चिली में खदान ढहने से यहां करने वाले 2 महीने से ज्यादा वक्त तक फंसे रहे थे। (फाइल)


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