कोरोनावायरस से नवजात कम ही प्रभावित हुए हैं, लेकिन यह गर्भाशय में पहुंच सकता है; विशेषज्ञ इसे लेकर एकमत नहीं

न्यूयॉर्क टाइम्स से विशेष अनुबंध के तहत. अब तक यह देखा गया है कि कोरोनावायरस से नवजात ज्यादा प्रभावित नहीं हुए हैं,लेकिन, तीन नई रिसर्च के मुताबिक, यह वायरस गर्भाशय में भ्रूण तक पहुंच सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ कहते हैं कि इनस्टडी कोपूरी तरह सही नहीं माना जा सकता, क्योंकि ये अभी बहुत छोटे स्तर पर हुई हैं। इनके आधार पर अभी यह नहीं कह सकते कि कोरोनावायरस सच में गर्भाशय की दीवारों को पार कर सकता है।

गर्भाशय की दीवारें किसी भी वायरस और बैक्टीरिया के लिए सबसे बड़ा अवरोध होती है। इस पर स्टडी कर चुकींपीट्सबर्ग यूनिवर्सिटी की डॉ. कैरोलिन कोयने कहती हैं, ‘‘मुझे नहीं लगता कि कोरोनावायरस गर्भाशय की दीवारों को पार कर सकता है। फिर भी, नई स्टडी में यह बात सामने आई है तो यह चिंता का विषय है, क्योंकि अगर वाकई वायरस गर्भाशय में पहुंच सकता है तो यह भ्रूण के लिए एक खतरा ही होगा।’’

गर्भवती को सांस से जुड़ी बीमारियों की आशंकाज्यादा रहती है
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में प्रसव के दौरान होने वाली महामारियों की विशेषज्ञ डॉ. क्रिस्टीना चेंबर्स बताती हैं, ‘‘गर्भवती महिलाओं को सांस से जुड़ी बीमारियों के संक्रमण की आशंकाज्यादा रहती है और यह उनके और उनके बच्चे के लिए हमेशा से एक खतरा रहाहै। हम इस बारे में अब तक कुछ नहीं जानते हैं। यह भी साफ नहीं है कि इस वायरस के गर्भ में पहुंचने के बाद भ्रूण पर क्या असर होगा।’’

गर्भाशय की दीवारें वायरस को रोक लेती हैं,एंटीबॉडीज को जाने देती हैं
आमतौर पर गर्भाशय की दीवारें नुकसान पहुंचाने वाले वायरस और बैक्टीरिया को भ्रूण तक पहुंचने से रोक लेती हैं। ये सिर्फ एंटीबॉडीज को जाने देती हैं, ताकि जन्म से पहले और जन्म के ठीक बाद किसी भी तरह के विषाणु से नवजात को सुरक्षित रखा जा सके। हालांकि, कुछ वायरस इन दीवारों को पार भी कर जाते हैं जैसे हाल ही में जीका वायरस को ऐसा करते पाया गया था। अगर जीका एक से तीन महीने के गर्भ के दौरान भ्रूण के संपर्क में आ जाता है तो इससे बच्चे का मस्तिष्क विकास प्रभावित होता है। उसे गहरा न्यूरॉलाजिकल नुकसान भी होने की आशंकारहती है।

डॉ. कोयने कहती हैं, ‘‘जीका की तरह कोरानावायरस भ्रूण को इतना नुकसान पहुंचाता नजर नहीं आता,लेकिन अगर ऐसा होता है तो गर्भ के गिरनेया समय से पहले प्रसव के ज्यादा मामले सामने आ सकते हैं।’’

तीन स्टडी में नवजातों में कोरोनावायरस को पहचानने वाली एंटीबॉडीज देखीं गई
मार्च में मेडिकल जर्नल ‘द लांसेट’ में छपे के एक आर्टिकल में वुहान में नौ नवजातों पर हुए अध्ययन के मुताबिक, मां से भ्रूण तक कोरोनावायरस पहुंचने का कोई मामला सामने नहीं आया। लेकिन गुरुवार को अमेरिका के जामा पेपर्स में छपी दो स्टडी के मुताबिक, डॉक्टर्स ने नवजातों में कुछ एंटीबॉडीज पायीं, जो वायरस को पहचान सकती थीं। यह इस ओर इशारा करती है कि एंटीबॉडीज की तरह ही कोरोनावायरस भीमां से भ्रूण में पहुंच सकता है।दोनों ही स्टडी में नवजातों में इम्यूनोग्लोब्यूलिन-जी नाम की एंटीबॉडीज को अच्छी संख्या में पाया गया। ये मां से ही भ्रूण तक पहुंचती है।तीन नवजातों में अलग तरह की एंटीबॉडीज भी देखी गईं। इन्हें इम्यूनोग्लोब्यूलिन-एम (आईजी-एम) नाम से जाना जाता है, ये भी कोरोनावायरस को पहचान सकती हैं।

वुहान मेटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ हॉस्पिटल में वॉलेंटियर एक गर्भवती महिला कोकोरोनावायरस टेस्ट के लिए ले जाते हुए। - फाइल

डॉक्टर्स के मुताबिकतीनों स्टडी में कुछ कमियां भी थीं
इन स्टडी में कमी बताते हुए डॉ. कोयने कहती हैं, ‘‘हो सकता है कि वायरस गर्भाशय की दीवार को पार कर गया हो, लेकिन इन स्टडी में गर्भाशय की दीवारों, गर्भनाल के रक्त और भ्रूम के आसपास के द्रव में वायरस को नहीं खोजा गया।’’ द लांसेट जर्नल में छपी स्टडी पर काम करने वाले नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. वी झांग बताते हैं, ‘‘जामा पेपर्स में छपी स्टडी में मां से भ्रूण में वायरस जाने के सबूत अप्रत्यक्ष थे, इनके आधार पर ये नहीं कहा जा सकता कि नवजात में वे एंटीबॉडीज मां से ही आई होंगी।’’



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अमेरिका में गर्भवती और नवजातों पर कोरोनावायरस के असर का अध्ययन शुरू हो चुका है। - प्रतीकात्मक चित्र


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