अमेरिकी वैज्ञानिकों की रिसर्च: मौसम जितना ज्यादा गर्म और हवा में जितनी ज्यादा नमी होगी, संक्रमण उतना ही कम फैलेगा

बोस्टन. दुनियाभर में कोरोनावायरस पर तापमान के असर को लेकर डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने कई दावे किए हैं। अब अमेरिका की मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफटेक्नोलॉजी (एमआईटी) के वैज्ञानिकों ने बताया है कि मौसम जितना ज्यादा गर्म होगा और हवा में जितनी ज्यादा नमी होगी, संक्रमण उतना ही कम फैलेगा। इस दावे के अनुसार जिन देशों मेंनमी ज्यादा है, अभी तक वहां वायरस का संक्रमण कम फैला है।

वैज्ञानिकों ने दुनिया के कई हिस्सों से कोरोना संक्रमण का डेटा इकट्‌ठा कर उसकी दो पैरामीटर- तापमान और नमी से तुलना की।इससे पता चला कि वायरस का 90% संक्रमण 3 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच के तापमान वाले क्षेत्रों (स्पेन, इटली, ब्रिटेन आदि)में हुआ। इन क्षेत्रों में 4 से 9 g/m3 (ग्राम प्रति मीटर क्यूब) नमी थी। मतलब एक घन मीटर हवा में 4 से 9 ग्राम पानी मौजूद है। एमआईटी के वैज्ञानिकों के अनुसार,ऐसे देश जहां पर तापमान 18 डिग्री सेल्सियस और नमी 9 g/m3 से ज्यादा है, वहां पर संक्रमण के 6% मामले कम आए हैं।

नमी इस तरहसंक्रमण को फैलने से रोकती है

वैज्ञानिकों ने बताया कि जब कोरोनावायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उसके थूक के बेहद बारीक कण हवा में फैल जाते हैं। इन्हीं कणों के जरिए संक्रमण फैलता है। व्यक्ति के छींकने पर एक वक्त पर थूक के 3,000 से अधिक कण निकलते हैं। नमी होने पर हवा संघनित होती है और ऐसे में उसमें किसी की वायरस या बैक्टीरिया का संचरण बहुत दूर तक नहीं हो पाता है। उदाहरण के तौर पर ऐसे समझिए- एक कमरे में हवा है और उसमें नमी नहीं है। ऐसे में हवा हल्की हो जाएगी। यदि हवा में वाष्प शामिल हो जाएगी तो उसमें नमी आ जाएगी, ऐसे में वह भारी हो जाएगी। हल्की हवा में कोई भी वायरस या बैक्टीरिया दूर तक पहुंचता है। वहीं, भारी हवा में यह एक सीमा से आगे नहीं बढ़ पाता है।

ज्यादा तापमान इस तरह से संक्रमण की रफ्तार रोकता है
कोविड-19 एक रेस्पिरेटरी वायरस है। इस तरह के वायरस ज्यादातर सर्दियों में पनपते है और गर्मियों में खत्म हो जाते हैं। गर्मी से वायरस के मरने का कोई ठोस सुबूत तो नहीं हैं। लेकिन, पिछली कुछ बीमारियों में इसका असर देखा गया है। 2002 के नवंबर में सार्स महामारी शुरू हुई थी जो जुलाई में खत्म हो गई थी। लेकिन, ये तापमान बदलने की वजह से हुआ यह कहना मुश्किल है।

एशिया के कई देशों में 10 g/m3 की नमी मौजूद है

वैज्ञानिकों ने अपने विश्लेषण के आधार पर पाया कि कई एशियाई देशों में संक्रमण फैलने की दर बाकी देशों जितनी तेज नहीं है। यहां के वातावरण में 10 g/m3 की नमी मौजूद है। इन देशों में वेस्टर्न डिस्टर्बेंसकी वजह से नमी आई है। आमतौर पर विंटर मानसून फरवरी से पहले खत्म हो जाता है। लेकिन, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से काफी समय बाद तक बारिश होती रहती है। वैज्ञानिकोंने यह भी कहा कि भारत, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और अफ्रीका के देशों में कम संख्या में कोरोना टेस्ट होना बहस का मुद्दा बन सकता है। लेकिन, कई देश जैसे- सिंगापुर, यूएई और सऊदी अरब में अमेरिका, इटली की तुलना में कहीं ज्यादा टेस्ट किए। इसके बावजूद यहां संक्रमण के उतने मामले सामने नहीं आए। वैज्ञानिकों ने कहा कि कम टेस्ट होना कोई मुद्दा नहीं है। साथ ही, कम कनेक्टिविटी की बात भी निराधार है। कम संक्रमण वाले कई देश ट्रैवल हब भी हैं और हजारों लोग यहां रोजाना प्रवेश करते हैं।

तापमान में उतार-चढ़ाव से बिगड़ते हैं हालात
रुहेलखंड विश्वविद्यालय में फार्मेसी के प्रोफेसर डॉ. अमित वर्मा ने कोविड-19 पर एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि तापमान में उतार-चढ़ाव से हालात ज्यादा बिगड़ते हैं। जहां दिन और रात के तापमान में अंतर होता है, वहां परेशानी बढ़ सकती है। उदाहरण के तौर पर जहां दिन का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 7 डिग्री हो जाता है,वहां संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। ईरान इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। फरवरी में ईरान का दिन का तापमान 17 से 18 डिग्री सेंटीग्रेड और रात का 1 से 2 सेंटीग्रेड हो जाता है। डॉ. अमित ने बताया कि संक्रमण कम करने के लिए जरूरी है कि तापमान ज्यादा हो और उसके साथ हवा में नमी भी ज्यादा हो। शुष्क हवा हमारी एपिथेलियल (ऊपरी त्वचा) को नुकसान पहुंचाती है, जिससे संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।


अमेरिका में भी दिखा संक्रमण का अलग-अलग स्तर
अमेरिका में भी उत्तर और दक्षिण के क्षेत्रों में संक्रमण का अलग-अलग स्तर है। यहां दक्षिण की तुलना में उत्तर के राज्य ठंडे हैं। उत्तरी राज्यों- न्यूयॉर्क (33,033 संक्रमित), न्यूजर्सी (4,407 संक्रमित ) में संक्रमण का स्तर ज्यादा है। वहीं, दक्षिण के राज्यों - टेक्सास (1,345 संक्रमित) न्यू मैक्सिको (113) और एरिजोना (401) में संक्रमण का स्तर कम है। यहां तक कि कैलिफोर्निया जो कि बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है, उसके दक्षिण और उत्तर में संक्रमण के स्तर में दोगुने का अंतर है। वैज्ञानिकों ने कहा कि मध्य पूर्व, दक्षिणी अमेरिकी देश और एशिया के कई क्षेत्रों में संक्रमण का स्तर कम है। इसमें से कई देशों ने चीन और यूरोप की तरह सख्त लॉकडाउन भी नहीं किया है।



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कोरोनावायरस का 90% संक्रमण 3 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच के तापमान वाले क्षेत्रों में हुआ।


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