लैंसेट की रिसर्च में दावा: लॉकडाउन हटाने में देशों ने जल्दबाजी की तो कोरोना के मामलों की बाढ़ आ जाएगी

कोरोनावायरस के कारण दुनियाभर में अब तक 1.14 लाख लोगों की जान जा चुकी है जबकि 18 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। ऐसे में दुनिया के कई देशों में जारी लॉकडाउन को कुछ देशों ने जहां बढ़ा दिया है, वहीं कुछ देश इसे हटाने की तैयारी कर रहे हैं। कुछ देश ऐसे भी हैं, जहां लॉकडाउन को पूरी तरह लागू न करके किसी राज्य या प्रांत तक ही सीमित रखा गया है।

लैंसेट जर्नल की रिसर्च रिपोर्ट में लॉकडाउन हटाने का सोचने वाले देशों को चेतावनी दी गई है कि वैक्सीन आने तक इसे नहीं हटाना चाहिए। इसमें कहा गया है कि बिना पूरी तैयारी किए प्रतिबंध हटाना नए सिरे से संक्रमण का तूफान ला सकता है। यह रिपोर्ट चीन के शोधकर्ताओं देश में आए मामलों के आधार पर तैयार की है।

कई देशों में लॉकडाउन सफल, 70% तक संक्रमण घटाने में कामयाबी मिली

  • लैसेंट के मुताबिक, बिना लॉकडाउन वाली स्थिति में एक संक्रमित व्यक्ति औसतन तीन लोगों को संक्रमित करेगा। लॉकडाउन की वजह से इस दर में 60-70 % गिरावट आ रही है।
  • रिसर्च में कहा गया है कि हम सोशल डिस्टेंसिंग खत्म करते हैं, तो वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए कोई और उपाय करने होंगे।
  • कई देशों में लॉकडाउन का प्रयोग सफल रहा है। 70% से ज्यादा तक संक्रमण को कम करने में कामयाबी मिली है।
  • चीन के शोधकर्ताओं के मुताबिक, लॉकडाउन हटाया तो इन्फेक्शन के लिए ज्यादा सतर्क होना पड़ेगा और वैक्सीन ना आने तक कई इलाकों को नियंत्रण में रखना होगा।
  • हांगकांग के शोधकर्ताओं का मानना है कि चीन ने सख्ती से संक्रमण की पहली लहर को तो काबू में कर लियापर अब दूसरी लहर का खतरा पैदा हो गया है। यह बड़ी चिंता है।
  • डब्ल्यूएचओ ने भी कहा है कि प्रतिबंधों को जल्दबाजी में हटाने के परिणाम घातक हो सकते हैं।

लॉकडाउन हटाया तो

चीन ने वुहान में लॉकडाउन खत्म किया था। वहां हाल में कोरोना के 108 केस आए। हुबेई प्रांत में 2 मौतें भी हुई हैं। लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन के डॉ. एडम कुचार्सकी का कहना है कोरोना से लड़ाई लंबी चलेगी।
लॉकडाउन लगाया तो

भारत में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि देश में लॉकडाउन नहीं होता तो 8 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो सकते थे। फिलहाल 10 हजार से कम हैं।



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कोरोना वायरस से बचाव के लिए सेंटिआगो में एक बिल्डिंग को सैनिटाइज करते हुए स्वास्थ्यकर्मी। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, कोरोना वायरस जैसी घातक बीमारी 2009 के स्वाइन फ्लू से 10 गुना ज्यादा खतरनाक है। इससे बचाव के लिए जल्द ही वैक्सीन तैयार करना जरूरी है। -फाइल फोटो


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