अमेरिका में किराएदारों को जबरदस्ती बाहर निकाल रहे, किराया न चुका पाने से बढ़ रहा है बेघर होने का खतरा

एलाना सैमुअल्स.कोरोना वायरस-कोविड-19 का भयानक प्रकोप झेल रहे अमेरिका में किराए के मकानों में रहने वाले लोगों के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गई है। मकान मालिक उन्हें घर से बाहर निकाल रहे हैं। कई राज्यों और शहरों में मकान खाली कराने पर रोक है, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा है। हाउसिंग वकीलों ने बताया कि देशभर में ऐसे मामलों की बाढ़ आ गई है। जिन लोगों ने किराया नहींं चुकाया है, मकान मालिक उन्हें जबरदस्ती बाहर कर देते हैं।

दूसरे सप्ताह तक केवल 69% किराएदारों ने किराया चुकाया था
राष्ट्रीय मल्टी फेमिली हाउसिंग कौंसिल के अनुसार, अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक केवल 69% किराएदारों ने किराया चुकाया था। मार्च में यह आंकड़ा 81% था। अटलांटा लायर्स फाउंडेशन होम प्रोजेक्ट के डायरेक्टर कोल थेलर कहते हैं, लैंडलॉर्ड का धैर्य जवाब दे रहा है। फाउंडेशन कम आय के लोगों को कानूनी सहायता देता है। थेलर से एक सप्ताह में तीन-चार लोग इस संबंध में मदद के लिए संपर्क करते हैं। आर्थिक गतिविधियां बंद होने से लोगों की आय प्रभावित हुई है। किराएदार और मकान मालिकों को भी इस स्थिति का सामना करना पड़ा है। फिर कानूनों को लेकर भ्रम की स्थिति है।

मकान मालिक किराएदारों को मकान खाली करने के नोटिस दे सकते हैं

कोलंबिया लॉकॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर एमिली बेनफेर के अनुसार, 41 राज्यों में मकान मालिक किराएदारों को मकान खाली करने के नोटिस दे सकते हैं। जिन किराएदारों को नोटिस मिलते हैं, उनमें से कुछ मकान खाली कर देते हैं जबकि खाली कराने पर रोक लगी है। संसद के एक सदन- कांग्रेस द्वारा पास केयर्स एक्ट में 120 दिन तक मकान खाली कराने पर रोक है। यह केवल उन मकानों पर लागू होता है जो सरकारी गारंटी के कर्ज पर लिए गए हैं। अर्बन इंस्टीट्यूट के अनुसार इस तरह की आवासीय संपत्तियां सिर्फ चार में से एक हैं।

20 राज्यों ने मकान खाली कराने के खिलाफ कानून बना रखे हैं
केवल 20 राज्यों ने मकान खाली कराने के खिलाफ कानून बना रखे हैं। सिर्फ कनेक्टीकट और हैम्पशायर ने हर तरह के कदम उठाने पर रोक लगाई है। बेनफर का कहना है, कुछ राज्यों ने ही सभी तरह की रोक लगा रखी है। अलास्का, मैरीलैंड सहित कुछ राज्यों में किराएदार को सबूत देना पड़ता है कि उनकी आर्थिक तंगी का कोविड-19 से संबंध है। कोलोरेडो, ओहायो ने खाली कराने की कार्रवाई स्थानीय प्रशासन पर छोड़ दी है। अरकंसास में अदालत ऐसे मामलों में फैसला करती हैं।

कनेक्टीकट में किराएदार को किराया चुकाने के लिए समय दिया जाता है
कई स्थानों में शैरिफ कोविड-19 प्रकोप से पहले मंजूर किए गए मामलों में खाली कराने की कार्रवाई कर रहे हैं। कनेक्टीकट में किराएदार को रोक खत्म होने के बाद भी किराया चुकाने के लिए कुछ समय दिया जाता है। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में हाउसिंग का अध्ययन करने वाली एलिएजा दुराना कहती हैं, एक बार अदालतों के खुलने के बाद मकान खाली कराने के मामलों की बाढ़ आ जाएगी। मकान मालिकों का कहना है, उनकी माली हालत भी खराब है। बड़ी संख्या में लोग किराया नहीं दे रहे हैं। ओरलैंडो जैसे शहरों में समूची इमारतों में बेरोजगार लोग रहते हैं। नेशनल अपार्टमेंट एसोसिएशन के सीईओ बॉब पिनेगर बताते हैं, थीम पार्क जैसी जगहों पर तो सभी लोग बेरोजगार हो चुके हैं।

कानून को लेकर कई राज्यों में भ्रम

  • मार्च की तुलना में अप्रैल में किराया न चुकाने वालों की संख्या में बढ़ोतरी।
  • मकान खाली कराने के नियमों से कई राज्यों में भ्रम की स्थिति बनी और विवाद भी बढ़ने लगे हैं।
  • कुछ किराएदार नोटिस मिलने के बाद विवाद से बचने के लिए फौरन मकान खाली कर देते हैं।
  • ओरलैंडो समेत कुछ बड़े शहरों में कई बिल्डिंग के पूरे किराएदार बेरोजगार हो चुके हैं।
  • वकीलों के पास जबरिया मकान खाली कराने के मामले आ रहे हैं।
  • किराएदारों को कोरोना वायरसके कारण आर्थिक तंगी होने का सबूत देना पड़ता है।

((टाइम और टाइम लोगो रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क हैं। इनका उपयोग अनुबंध के तहत किया गया है।)



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हाउसिंग वकीलों ने बताया कि देशभर में ऐसे मामलों की बाढ़ आ गई है। जिन लोगों ने किराया नहींं चुकाया है, मकान मालिक उन्हें जबरदस्ती बाहर कर देते हैं।


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