मदद का विज्ञान: कोरोना संकट में फंंसे लोगों की मदद करें क्योंकि दान देने से सेहत अच्छी होती है

(टारा पार्कर) कोरोनावायरस के संक्रमण काल में आज हम सभी परेशान हैं, तनाव में हैं। ऐसे में विज्ञान हमें इससे निपटने का सबसे आसान तरीका बताता है। मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए सबसे सरल तरीका है दूसरों की मदद करना। कई ऐसे रिसर्च हैं जो साबित करते हैं कि जब भी कोई बड़ी आपदा हो, दुनिया उससे परेशान चल रही हो तो आप किसी की मदद कीजिए। इससे आपकी खुद की सेहत अच्छी रहेगी। वॉरटन स्कूल के मनोवैज्ञानिक एडम ग्रैंट कहते हैं, ‘ऐसे कई तथ्य हैं जो बताते हैं कि चिंता की सबसे अच्छी दवा उदारता है।’

मदद करने से स्ट्रेस कम होता है

एडम मशहूर किताब ‘गिव एंड टेक: अ रेवॉल्यूशनरी एप्रोच टू सक्सेस’ के लेखक भी हैं। अध्ययन बताते हैं कि जब हम किसी की मदद करते हैं,दान देते हैं, बल्कि सिर्फ दान देने की सोचते भी हैं तो हमारे दिमाग में कुछ ऐसे केमिकल रिलीज होते हैं, जिनसे हमें अच्छा महसूस होता है। यह हमारे मस्तिष्क के उस हिस्से को सक्रिय कर देता है, जिससे भोजन संबंधी आनंद जुड़ा होता है। अध्ययन बताते हैं कि जिस दिन कोई वॉलेंटियर किसी की मदद करता है, उस दिन उसके शरीर में स्ट्रेस हर्मोन कॉर्टीसोल का स्तर कम होता है।

आप किसी को फोन कॉल करके भी मदद कर सकते हैं

हालांकि, आज हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हमें किसी की मदद दूर रहते हुए करनी है। यानी ऐसी किसी महामारी में हम अपने पारंपरिक तरीके से मदद नहीं पहुंचा सकते हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि ऐसे कई तरीके हैं, जिनसे देने वाले और लेने वाले दोनों का भला हो सकता है। इसके कई छोटे-बड़े तरीके हैं। इसमें किसी की आर्थिक मदद करने से लेकर किसी को समय देना तक काफी है। यह इतना सरल है कि ऐसे संकट के समय में आप किसी को फोन कॉल करके भी मदद कर सकते हैं, उसे कोई सलाह दे सकते हैं। बल्कि फोन पर उसकी बात सुनना भी एक जरूरी मदद हो सकती है। यह भी देखा गया है कि किसी को सलाह देना, सलाह लेने से ज्यादा फायदेमंद है।

दूसरों कीमदद करने वाले खुद अपने संकट से बेहतर तरीके से सामना कर सकते हैं

अमेरिका के पेंसिलवेनिया विश्वविद्यालय और शिकागो विश्वविद्यालय ने 2274 लोगों पर किए गए अपने अध्ययन में पाया है कि जिन मिडिल स्कूल स्टूडेंट ने अपने से छोटी उम्र के छात्रों की पढ़ाई में मदद की, उन्होंने खुद अपने होमवर्क पर भी ज्यादा समय दिया। इसी तरह जिन ज्यादा वजन वाले लोगों ने दूसरों को वजन कम करने की सलाह दी, वे खुद वजन कम करने के लिए ज्यादा प्रेरित नजर आए। कई स्टडी में यह भी साबित हुआ है कि जब हम किसी के प्रति जिम्मेदारी का रवैया रखते हैं, तो हम खुद के सामने आने वाली चुनौतियों से बेहतर तरह से निपट सकते हैं।

रटगर्स यूनिवर्सिटी की सोशल वर्क की प्रोफेसर एमिली ए ग्रीनफील्ड ने ‘फेल्ट ऑब्लीगेशन’ नाम के कॉन्सेप्ट का अध्ययन किया है। इसमें ऐसे सवाल पूछे जाते हैं जैसे- क्या आपका मित्र संकट में है तो आप उसकी आर्थिक मदद करना अपना दायित्व समझते हैं? करीब 849 लोगों के डेटा का अध्ययन करने पर पता चला कि जो लोग दूसरों की मदद करते हैं वे खुद अपने जीवन में आए संकट से बेहतर तरीके से निपटते हैं।



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कई ऐसे रिसर्च हैं जो साबित करते हैं कि जब भी कोई बड़ी आपदा हो, दुनिया उससे परेशान चल रही हो तो आप किसी की मदद कीजिए। इससे आपकी खुद की सेहत अच्छी रहेगी। -फाइल फोटो


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