ट्रम्प ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन मिलने पर कहा- मोदी ने हमें दवाएं दीं, वे बहुत अच्छे और महान

ट्रम्प ने बुधवार कोहाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की दवा को लेकरभारत के प्रति अपना रुख बदलते हुए प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की। उन्होंने अमेरिकी चैनल फॉक्स न्यूज से टेलीफोनिक बातचीत में कहा, ‘‘मैंनेंमिलियन में डोज खरीदी हैं। 29 मिलियन (2.9 करोड़) से ज्यादा। मैंनेप्रधानमंत्री मोदी से भी बात की है। इनमें से सबसे ज्यादा (डोज) इंडिया से आएंगी। मैंनेंपहले उनसे पूछा था कि क्या वो दवाएं (हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन) देंगे। उन्होंने हमें दवाएं दीं। वह महान हैं। वह बहुत अच्छे हैं। आप जानते हैं उन्होंने ये दवाएं रोक रखी थीं क्योंकि वे इसे भारत के लिए चाहते थे। मोदी के इस निर्णय से बहुत सारी अच्छी चीजें हुई हैं।’’

एक दिन पहले मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने धमकी देते हुए कहा था कि अगर भारत उनके व्यक्तिगत आग्रह के बावजूद दवा नहीं भेजता है तो उसका जवाब दिया जाएगा। इसके 6 घंटे बाद भारत ने अपनी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह दवा दूसरे देशों को भेजने की घोषणा की थी।
विदेश मंत्रालय ने हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की आपूर्ति पर रोक लगाई थी

सरकार ने घरेलू बाजार में उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात पर 25 मार्च को रोक लगाने की घोषणा की थी। पिछले शनिवार को ट्रम्प ने भारत से हाइड्रक्सीक्लोरोक्वीन की आपूर्ति करने का अनुरोध किया था। इसके बावजूद भारत सरकार ने दवा के निर्यात पर पाबंदी और सख्त कर दी थी।विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज) की इकाइयों को भी रोक के दायरे में शामिल कर दिया गया था। भारत सरकार नेदेश में कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण स्थिति बिगड़ने की आशंकाओं को देखते हुए ये रोक लगाई थी, ताकि देश में जरूरी दवाओं की कमी नहीं हो। हालांकि, बुधवार को इसके निर्यात पर लगी पाबंदियों में बदलाव किया गया। बुधवार को विदेश विभाग के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था किमानवीयता के आधार पर सरकार ने फैसला लिया कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन और पैरासिटामॉल को पड़ोस के उन देशों को भी भेजा जाएगा, जिन्हें हमसे मदद की आस है।

ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के प्रेस कॉन्फेंस में भारत के फैसले पर हैरानी जताई थी

मंगलवार तड़के व्हाइट हाउस में हुए प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ट्रम्पसे सवाल पूछा गया, ‘‘क्या आपको चिंता है कि आपकी तरफ से अमेरिका के उत्पाद के एक्सपोर्ट में पाबंदी लगाने की प्रतक्रिया आएगी, जैसे की भारतीय पीएम मोदी ने अमेरिका को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन न देने का डिसीजन लिया है।’’ जवाब देते हुए ट्रम्प ने कहा,‘‘मुझे यह डिसीजन पसंद नहीं आया। मैंने नहीं सुना कि यह उनका डिसीजन है। हां मैनें यह सुना है कि उन्होंने कुछ देशों के लिए पाबंदी लगाई है। मैंने कल उनसे बात की थी। हमारी अच्छी बात हुई। मैं बहुत आश्चर्यचकित होऊंगा अगर वे दवा पर पाबंदी लगाते हैं। क्योंकि भारत कई सालों से अमेरिका से व्यापार में लाभ ले रहा है।मैंने रविवार सुबह प्रधानमंत्री मोदी से कहा था कि अगर वह हमारी (हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की) सप्लाई को अनुमति देते हैं तो हम उनकी सराहना करेंगे। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो इसका जवाब दिया जाएगा, आखिर क्यों नहीं दिया जाए?’’

क्या है हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन?

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन भारत में मलेरिया के इलाज की पुरानी और सस्ती दवा है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच यह दवा एंटी-वायरल के रूप में इस्तेमाल हो रहा है। भारत हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के सबसे बड़े निर्माताओं में से एक है।हालांकि, फिलहाल इसके कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन कोरोना जैसी महामारी को पूरी तरह से खत्म कर देता है क्योंकि चीन की झेजियांग यूनिवर्सिटी द्वारा पब्लिश किए गए जर्नल के मुताबिक, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन लेने वाला संक्रमित व्यक्ति से तुलना की जाए जिन्हें हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन न लेने वाला पीड़ित व्यक्तिकोरोना से ज्यादा समय तक लड़ सकता है।



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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड्र ट्रम्प ने बुधवार को भारत से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन मिलने की पुष्टि की। उन्हों दवा उपलब्ध करवाने पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की।-फाइल फोटो


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