एच-1बी वीजा पर काम करने वाले लोगों के बच्चों को देश आने पर रोक, कहा जा रहा- वे अमेरिकी नागरिक

अमेरिका में कई भारतीय या तो एच-1बी वर्क वीजा या ग्रीन कार्ड काम करतेपर हैं। वहीं, उनके बच्चेजन्म से अमेरिकी नागरिक हैं, इसकी वजह सेउन्हें भारत जाने से रोका जा रहा है। वंदे भारत मिशन के तहत एयर इंडिया कई देशों से अपने नागरिकों को निकाल रही है।

भारत सरकार द्वारा जारी किए गए नियमके मुतबिक,विदेशी नागरिकों के लिए जारी सभी वीजा और विदेशों में रहने वाली भारतीय मूल के लोगों के लिए ओआईसी कार्ड वीजा मुक्त यात्रा को अंतरराष्ट्रीय यात्रा प्रतिबंध लागू रहने तक निलंबित कर दिया गया है।

न्यू जर्सी में रहने वाले पांडे जैसे दंपती (नाम और जगह बदला हुआ है) के लिए यह बुरी खबर है। अपनी नौकरी खोने के बाद, उन्हें नियमों के तहत 60 दिनों के भीतर भारत वापस जाना होगा। उनके दो बच्चे हैं, जिनकी उम्र एक और छह साल है। दोनों जन्म से अमेरिकी नागरिक हैं।

‘अधिकारियों के हाथ बंधे’

सोमवार को दोनों को नेवार्क हवाई अड्डे से वापस लौटना पड़ा। क्योंकि वैध भारतीय वीजा होने के बावजूद एयर इंडिया ने उनके बच्चों को उनके साथ भारत जाने के लिए टिकट देने से इनकार कर दिया। रतना पांडे ने बताया कि एयर इंडिया और (भारतीय) वाणिज्य दूतावास (न्यूयॉर्क में) के अधिकारी बहुत सहयोगी थे। लेकिन वे कुछ भी नहीं कर सके। क्योंकि भारत सरकार द्वारा जारी किए गए नए नियमों के तहत उनके हाथ बंधे थे।

रतना ने कहा,‘‘मैं भारत सरकार से मानवीय आधार पर उनके फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह करूंगी।’’ उन्होंने यहां अपनी नौकरी खो दी है, लेकिन 60 दिनों के भीतर वे अमेरिका नहीं छोड़ सकते। अब वह इस अवधी को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी सिटिजनशिप और इमिग्रेशन सर्विस में अपील करने की योजना बना रही हैं।

60 दिनों में देश छोड़ने की अवधी को बढ़ाने का आग्रह

पिछले महीने एच-1बी वीजा धारकों, इनमें ज्यादातर भारतीयों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से आग्रह किया था कि नौकरी खोने के बाद 60 दिनों के भीतर देश छोड़ने की अवधी को 180 दिन बढ़ाया जाए। हालांकि, व्हाइट हाउस की ओर से अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं किया गया है।हालांकि इस बात का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है कि कितने भारतीय एच-1बी वीजा धारकों ने अपनी नौकरी खोयी है।

अमेरिका में बेरोजगारी दर बढ़ी

कोरोनावायरस के चलते अमेरिका में बेरोजगारी दर काफी बढ़ गई है। दो महीनों में 3.3 करोड़ से ज्यादा अमेरिकी नागरिक बेरोजगार हुए हैं। बड़े पैमाने पर बेरोजगारी को देखते हुए जिन भारतीय ने अपनी नौकरी खोयी है, उन्हें दोबारा मिलने की संभावना नहीं है। इसके चलते उनके पास वापस लौटने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।

‘अब अमेरिका में नहीं रहना चाहती’

सिंगल मदर ममता (बदला हुआ नाम) की स्थिति और भी गंभीर है। क्योंकि उनका बेटा अभी तीन महीने का है। लेकिन सिर्फ उन्हें टिकट दिया गया। उनके बच्चे को उनके साथ जाने की अनुमति नहीं दी गई, क्योंकि वह अमेरिकी नागरिक था। उन्होंने कहा- मैं भारत सरकार से घर जाने देने का अनुरोध करूंगी। मैं अब यहां नहीं रहना चाहती। यहां स्थिति खराब होती जा रही है औरमैं अकेली हूं। वे रविवार को अहमदाबाद जाने के लिए नेवार्क पहुंची थीं।

‘वंदे भारत एकअमानवीय मिशन बन गया है’

वॉशिंगटन डीसी के राकेश गुप्ता (बदला हुआ नाम) ने कहा- वंदे भारत मिशन एक मानवीय मिशन है। लेकिन यह निश्चित रूप से अमानवीय हो गया है। गुप्ता ने भी अपनी नौकरी खो दी है और 60 दिनों के भीतर भारत लौटने की जरूरत है। उन्हें और उनकी पत्नी, गीता (बदला हुआ नाम) को जाने की अनुमति मिली, लेकिन उनकी ढ़ाई साल की बेटी को रोक दिया गया। गुप्ता ने कहा कि मुझे इस पर विश्वास नहीं हुआ।

तीनों भारतीय नागरिकों ने भारत सरकार से अनुरोध किया कि वे मौजूदा नियमों में जरूरी बदलाव कर उन्हें घर वापस आने में मदद करें।



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अमेरिका में फंसे भारतीय देश जाने के लिए नेवार्क हवाई अड्डा पहुंचे। वंदे भारत मिशन के तहत भारत सरकार विदेशों में फंसे अपने नागरिकों को निकाल रही है।


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