चीन ने हांगकांग के प्रदर्शनकारियों को ‘पॉलिटिकल वायरस’ बताया, कहा- इन्हें साफ किए बिना शांति नहीं आ सकती

चीन ने हांगकांग के प्रदर्शनकारियों को ‘पॉलिटिकल वायरस’ बताया है। प्रदर्शनकारियों को जहरीला और हिसंक बताते हुए कहा कि जब तक इन्हें समाप्त नहीं किया जाता तब तक शहर में शांति नहीं आ सकती।बुधवार को चीन के हांगकांग और मकाओ मामलों के कार्यालय (एचकेएमएओ) की ओर से चेतावनी दी गई। हांगकांग में हुए प्रदर्शनों पर चेतावनी जारी करते हुए कहा गया कि चीन इस पर चुप नहीं बैठेगा।
चेतावनी में कहा गया, ‘‘प्रदर्शनकारियों का मंत्र "अगर हम जलेगें हैं, तो आप भी हमारे साथ जलेंगे" एक राजनीतिक वायरस है। आंदोलन के आयोजक हांगकांग को ऊंचाई से खींचकर नीचे पटकना चाहते हैं। इसके साथ ही कई हांगकांग वासियों के मन में उनके प्रति सहानुभूति है। अत्याचारियों के प्रति जितनी सहानुभूति होगी, हांगकांग को उतनी ही बड़ी कीमत चुकानी होगी।’’एचकेएमएओ का यह बयान हांगकांग में सितंबर में होने वाले चुनाव से पहले आया है। इसमें साफ तौर पर लोकतंत्र समर्थक नेताओं को धमकी दी गई है।

जून से लेकर अब तक सात हजार प्रदर्शनकारी गिरफ्तार हुए
हांगकांग में विरोध प्रदर्शन जून 2019 में शुरू हुए थे। तब से लेकर अब तक सात हजार प्रदर्शनकारी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। कोरोनावायरस के चलते यहां प्रदर्शन थम गया था। अब फिर से यहां छिटपुट प्रदर्शन शुरू हुए हैं। कुछ हफ्ते पहले ही हांगकांग की पुलिस ने लोकतंत्र समर्थक 14 प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार किया है।

प्रत्यर्पण बिल के खिलाफ शूरू हुआ था प्रदर्शन
हांगकांग के मौजूदा प्रत्यर्पण कानून में कई देशों के साथ इसके समझौते नहीं है। इसके चलते अगर कोई व्यक्ति अपराध कर हांगकांग वापस आ जाता है तो उसे मामले की सुनवाई के लिए ऐसे देश में प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता। चीन भी इस लिस्ट से बाहर था। पिछले साल हांगकांग प्रशासन एक प्रत्यर्पण बिल लेकर आया था, जिसके मुताबिक अगर हांगकांग का कोई व्यक्ति चीन में कोई अपराध करता है तो उसके खिलाफ हांगकांग में नहीं बल्कि चीन में मुकदमा चलाया जाएगा। इसके विरोध में प्रदर्शन शुरू हो गए थे। बिल वापस लेने बाद भी ये प्रदर्शन नहीं थमे और लोकतंत्र की मांग की जाने लगी।



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हांगकांग में चीन के प्रत्यर्पण बिल के खिलाफ पिछले साल विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। बिल वापस लेने के बाद भी ये प्रदर्शन नहीं थमे और लोकतंत्र की मांग होने लगी।


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