अमेरिका और ब्रिटेन ने चीन के नए सुरक्षा कानून पर चिंता जताई, चीन और रूस बोले- अपने काम से मतलब रखें

हॉन्गकॉन्ग में चीन के ओर से लागू किए गए विवादित सुरक्षा कानून का मुद्दा अब संयुक्त राष्ट्र में पहुंच गया है। संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) मेंशुक्रवार को इस मामले पर चर्चाहुई। चर्चा में अमेरिका और ब्रिटेन ने चीन के नए कदम पर चिंता जताई है। जवाब में चीन ने कहा कि अपने काम से मतलब रखें। रूस ने इस मामले पर चीन का साथ दिया है।

बंद कमरे में वर्चुअल मीटिंग हुई
चीन ने हॉन्गकॉन्ग में नया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू किया है, जिसके तहत चीन का विरोध करना देशद्रोह माना जाएगा। इसको लेकर अमेरिका ने सुरक्षा परिषद से औपचारिक और खुली बैठक की मांग की थी। अलजजीरा की खबर के मुताबिक 15 सदस्यीय परिषदने खुले तौर पर चर्चा करने से मना कर दिया, लेकिन बंद कमरे में अनौपचारिक रूप से वर्चुअल मीटिंग हुई। मालूम हो किबंद कमरे पर हुई किसी भी बैठक का रिकॉर्ड नहीं रखा जाता है और इसका आधिकारिक बयान भी नहीं जारी होता।

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के दूत केली क्राप्ट ने पूछा, ‘‘क्या हम हॉन्गकॉन्ग के लाखों नागरिकों के मानवाधिकार और सम्मान से जीने के अधिकारों की रक्षा के लिए एक स्डैंड लेगें?... या क्या हम चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने और उसकी इच्छा को हॉन्गकॉन्ग के लोगों पर थोपने की अनुमति देंगे।’’ ब्रिटेन के दूत जोनाथन एलेन ने कहा, ‘‘चीन का नया कानून हॉन्गकॉन्ग के लोगों की स्वतंत्रता पर खतरा है। हम इस बात से भी चिंतित हैं कि ... यह हांगकांग में विभाजन को बढ़ा देगा।’’

रूस ने कहा अमेरिका अपने यहां खुद प्रदर्शनकारियों को कुचल रहा
चीन और रूस के दूतों ने परिषद की चर्चा के दौरान अमेरिका में अश्वेत की पुलिस की बर्बरता से हत्या करने का मुद्दा उठाया। रूस के दूत दमित्री पोलंस्की ने परिषद की चर्चा के बाद ट्विटर पर पोस्ट किया, ‘‘हॉन्गकॉन्ग में शांति और व्यवस्था को बहाल करने के चीन के अधिकार पर अमेरिका को क्यों आपत्ति है? जबकि वह अपने यहां खुद प्रदर्शनकारियों को बेरहमी से कुचल रहा है।’’ चीन के दूत झांग जुन ने एक बयान में कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन को चीन के आंतरिक मामलों में दखल देने के बजाय अपने काम से मतलब रखना चाहिए।

ट्रम्प ने कहा- अमेरिकी यूनिवर्सिटी में चीनी छात्रों को आने से रोकेंगे
ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि वह अमेरिका की तरफ से हॉन्गकॉन्ग को मिले कई विशेष अधिकारों को समाप्त करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिकी यूनिवर्सिटी में चीन से आने वाले छात्रों की संख्या में कटौती करेंगें।

अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया पहले भी कर चुके चीन की आलोचना
हॉन्गकॉन्ग के मुद्दे पर सुरक्षा परिषदकी चर्चा से पहले गुरुवार को अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने एक संयुक्त बयान जारी कर चीन के इस कदम की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि चीन का यह कदम ‘एक देश, दो सिस्टम’ ढांचे को कमजोर करेगा। इसके साछ ही यह यूएन में दर्ज चीन-ब्रिटिश के संयुक्त घोषणा के सिद्धांतों का भी हनन है।

साउथ चाइना सी से होकर गुजरा अमेरिकी वॉरशिप

साउथ चाइना सी (दक्षिण चीन सागर) में चीन को चुनौती देते हुए अमेरिका का जंगी जहाज गुजरा है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरीकी नौ सेना के आर्ले बर्क श्रेणी का डिस्ट्रॉयर यूएसएस मस्टिन पारासेलआईलैंड के पास से गुजरा। अमेरिकी नैवी के सातवें बेड़े के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट एंथनी जुंको ने कहा, ‘‘28 मई को यूएसएस मस्टिन अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप पारासेल आईलैंड के पास से गुजरा और इस क्षेत्र में सबका अधिकार होने का दावा किया।’’ चीन के साथ वियतनाम और ताइवान भी पारासेल आईलैंड में अपना दावा करते हैं।



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चीन के नए सुरक्षा कानून के विरोध में हॉन्गकॉन्ग में प्रदर्शन करते लोकतंत्र समर्थक। - फाइल फोटो


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