अश्वेत जॉर्ज की बर्बर हत्या के विरोध प्रदर्शनों में श्वेत भी शामिल, इन लोगों ने कहा- सांस लेने का हक तो सबको है

जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस के हाथों हत्या हुए एक हफ्ता बीत चुका है। लेकिन, विरोध प्रदर्शन, हिंसा और कुछ जगहों पर आगजनी और लूट का सिलसिला बदस्तूर जारी है। खास बात ये है कि प्रदर्शनकारियों में सिर्फ अश्वेत शामिल नहीं हैं। एक बड़ी तादाद श्वेत अमेरिकियों की भी है। इनमें छात्र भी शामिल हैं। इनका कहना है- जॉर्ज की बेरहमी से सांस रोकी गई। उसकी जान चली गई। पुलिस ऐसा कैसे कर सकती है? हम सिर्फ इसलिए चुप नहीं बैठ सकते क्योंकि श्वेत हैं। आखिर सांस लेने का हक तो सबको है। यहां चुनिंदा तस्वीरें। जो अमेरिकी पुलिस की वहशियाना सोच और कार्रवाई के विरोध में उठ रही आवाजों को बयां करती हैं.....

मिनेपोलिस में ही जॉर्ज की बेरहमी से हत्या की गई थी। यह कत्ल उस पुलिस ने किया जिस पर जान बचाने का जिम्मा है। सोमवार रात विरोध प्रदर्शन में निकाली गई रैली को छत से देखते लोग।
तस्वीर पेन्सिलवेनिया के फिलाडेल्फिया की है। प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची पुलिस और नेशनल गार्ड्स ने जब ताकत का इस्तेमाल किया तो एक प्रदर्शनकारी सड़क पर लेट गया।
यह तस्वीर भी फिलाडेल्फिया की है। पुलिस ने यहां सख्ती की तो कई प्रदर्शनकारी सड़क पर लेट गए। इनके हाथ में जो बैनर थे, वो पुलिस ने छीन लिए। यह सिलसिला कई घंटे चला।
कैलिफोर्निया के ओकलैंड में भी फ्लॉयड की हत्या के विरोध में सोमवार देर रात तक प्रदर्शन जारी थे। इनमें युवाओं की संख्या ज्यादा थी। ये लाउडस्पीकर भी साथ लाए।
विरोध के लिए कई तरीके इस्तेमाल किए जा रहे हैं। 27 साल की विक्टोरिया स्लोन के हाथ में आप एक बैनर देख रहे हैं। वो कहती हैं- जॉर्ज को क्यों मारा गया? आज वो मारा गया है। हो सकता है अगली बारी मेरे पिता, भाई, चाचा या किसी दोस्त की हो। चुप रहना अब कायरता होगी।
विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई जगह से हिंसा की खबरें भी आ रही हैं। सोहो के ब्रॉडवे में यह तस्वीर एक बड़े गारमेंट शोरूम की है। प्रदर्शनकारियों ने यहां लूटपाट और तोड़फोड़ की। बाद में पुलिस ने हालात संभाले।
कुछ प्रदर्शनकारी ऐसे भी हैं जिन्हें इस तरह का माहौल पहली बार देखने मिला। और वो पहली बार ही अन्याय के खिलाफ सड़कों पर उतरे। 18 साल के गेबे जोन्स इसी फेहरिस्त का हिस्सा हैं।
न्यूयॉर्क में दोहरी मार है। यहां महामारी ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई। अब जॉर्ज की हत्या के विरोध में प्रर्दशन और हिंसा हो रही है। यहां कर्फ्यु लगाए जाने के पहले सड़कों पर कुछ इस तरह के हालात थे।
कुछ लोग विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा तो नहीं हैं लेकिन, प्रदर्शनकारियों की हौसला अफजाई जरूर कर रहे हैं। तस्वीर ब्रुकलिन के कुछ ऐसे ही युवाओं की है।
मैनहट्टन में सोमवार देर रात तक विरोध प्रदर्शन जारी थे। यह तस्वीर यहां के मशहूर मैनहट्टन ब्रिज की है। यहां कई घंटे तक नारेबाजी और हंगामा होता रहा।
लोगों को रोकने के लिए आंसू गैस और रबर बुलेट का इस्तेमाल किया गया।
सिएटल में पुलिस मुख्यालय के बाहर लोगों ने हाथ बांधकर चेन बनाई। इस दौरान शहर के दूसरे हिस्सों में भी प्रदर्शन होते रहे।
अमेरिका ही ब्रिटेन और स्पेन में भी जॉर्ज की हत्या का विरोध हो रहा है। तस्वीर स्पेन के बार्सिलोना की है। यहां भी कुछ लोगों ने मास्क पहनकर घटना पर विरोध जताया। मास्क पर लिखा था- मैं सांस नहीं ले पा रहा या रही हूं।
वॉशिंगटन डीसी में हालात जब बेकाबू होने लगे तो नेशनल गार्ड्स को कमान सौपी गई। अब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प कह रहे हैं कि अब भी हालात नहीं सुधरे तो फौज तैनात की जाएगी।


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जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद हो रहे विरोध में बड़ी तादाद श्वेत अमेरिकियों की भी है। इनमें से ज्यादातर छात्र हैं। वॉशिंगटन में जब पुलिस इन्हें हटाने पहुंची तो इन्होंने घुटने कुछ इस अंदाज में टिका दिए। दरअसल, जॉर्ज की हत्या के आरोपी पुलिस अफसर ने भी उसकी गर्दन पर घुटना इसी तरह लगाया था। इससे जॉर्ज का दम घुट गया और मौत हो गई।


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