अमेरिकी पुलिस अफसरों और श्वेतों ने अश्वेतों के पांव धोकर संदेश दिया- इंसानियत सबसे बड़ी नस्ल

अमेरिका के 140 से ज्यादा शहरों में नस्लभेद के खिलाफ जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच नॉर्थ कैरोलिना से एक तस्वीर आई है। इसमेंपुलिस ने प्रदर्शन करने आए अश्वेत लोगों को बेंच पर बैठाया और उनके पांव धोने शुरू कर दिए। पुलिस ने कहा कि हम सिर्फ यही संदेश देना चाहते हैं कि इंसानियत से बड़ी कोई नस्ल नहीं है। दरअसल,पुलिस सामाजिक संगठनों को साथ लेकर अश्वेतों में भरे गुस्से को शांत करने की कोशिश कर रही है।

25 मई को गिरफ्तारी के दौरान अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लाॅयड की मौत हो गई थी। उसके बाद से अमेरिका के साथ-साथ दुनियाभर मेंविरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।अमेरिका के सभी प्रांतों के अलावा ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन, इटली, ऑस्ट्रेलिया, जापान, डेनमार्क, नीदरलैंड्स, फिनलैंड और प्रेटोरिया में हजारों लोग विरोध जताने सड़कों पर उतरे।

पूर्व उप-राष्ट्रपति जो बिडेन ह्यूस्टन में फ्लॉयड के परिवार से मुलाकात करेंगे

उधर, अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड के परिवार और दोस्तों ने उन्हें श्रद्धांजलि और अलविदा कहने की तैयारी शुरू कर दी है। मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार होगा। पूर्व उप-राष्ट्रपति जो बिडेन ने पुष्टि की है कि वह ह्यूस्टन में फ्लॉयड के परिवार से मुलाकात करेंगे। वह व्यक्तिगत रूप से संवेदना व्यक्त करेंगे और फ्लॉयड की अंतिम संस्कार के लिए एक वीडियो संदेश भी देंगे।

मिनेपोलिस में पुलिस विभाग खत्म करने की योजना

मिनेपोलिस नगर परिषद पुलिस विभाग खत्म कर सकता है या फिर सभी अधिकारियों का ट्रांसफर किया जा सकता है। सिटी पार्क में हुई परिषद सदस्यों की बैठक में सुरक्षा का नया मॉडल तैयार करने का प्रस्ताव रखा गया। इस दौरान सदस्यों ने कहा कि दशकों की कोशिशों के बावजूद साबित हो गया है कि मिनेपोलिस पुलिस नहीं सुधर सकती। हम शहर में पुलिसिंग व्यवस्था खत्म करने की योजना बना रहे हैं। उधर न्यूयॉर्क के मेयर बिल डे ब्लासियो ने भी न्यूयॉर्क पुलिस की फंडिंग कम करके बची हुई राशि सामाजिक कामों में लगाने की बात कही है।

जर्मनी: 15 हजार लोगों की रैली, हिंसा भी हुई
बर्लिन में पुलिस ने प्रदर्शन के सिलसिले में 93 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें से अधिकतर लोगों को 15 हजार लोगों की मुख्य रैली के समापन पर हिरासत में लिया गया। पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को शहर के एलेक्जेंडर चौराहे से हटने के लिए कहा गया था। इसके बावजूद भीड़ में मौजूद लोगों ने वहां अधिकारियों पर बोतलें और पत्थर फेंके, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए।

बर्लिन में 15 हजार लोगों ने रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन दर्ज कराया। पुलिस ने 93 लोगों को हिरासत में भी लिया।

डेनमार्क: अमेरिकी दूतावास के बाहर प्रदर्शन
डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में अमेरिकी दूतावास के सामने 16 हजार से ज्यादा लोगों ने मार्च निकाला। पीएम मैटे फ्रैडरिकसन ने इस आंदोलन में साथ देने के लिए लोगों की तारीफ की। उधर स्पेन के बार्सिलोना और मैड्रिड में हजारों लोग सड़कों पर ब्लैक लाइव्स मैटर की तख्तियां लेकर उतरे। लोगों का कहना था कि ये प्रदर्शन सिर्फ फ्लॉयड के लिए नहीं हैं, स्पेन में रहने वालों को भी रंगभेद झेलना पड़ता है।

प्रदर्शनकारी बोले-ये प्रदर्शन सिर्फ फ्लॉयड के लिए नहीं हैं, स्पेन में रहने वालों को भी रंगभेद झेलना पड़ता है।

नीदरलैंड्स: सोशल डिस्टेंसिग के साथ विरोध
नीदरलैंड्स के प्रमुख शहर मास्ट्रिच के पार्क में लोगों ने बैठकर विरोध जताया। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान भी रखा गया। इसके अलावा रोम के पीपल्स स्क्वायर पर रैली शांतिपूर्ण रही, वहां मौजूद लोगों ने रंगभेद पर भाषण सुने। इस दौरान उन्होंने तख्तियां ले रखी थीं, जिन पर ब्लैक लाइव्स मैटर और ‘इट्स’ अ व्हाइट प्रॉब्लम लिखा था। रोम के अलावा मिलान में भी लोगों ने मार्च निकाला।

लोगों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया।

कनाडा: लगातार दूसरे हफ्ते प्रदर्शन-रैलियां
कनाडा में फ्लॉयड की मौत की खबर के बाद से ही प्रदर्शन शुरू हो गए थे। रविवार को भी रंगभेद, पुलिस की ज्यादतियों के खिलाफ मार्च निकाले गए। इसके बाद मौन रखकर फ्लॉयड को श्रद्धांजलि भी दी। फ्रांस के मार्शिले में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर झड़प के दौरान आंसूगैस के गोले दागे। प्रदर्शनकारी सुरक्षाकर्मियों पर बोतल और पत्थर फेंक रहे थे। प्रदर्शन के दौरान 23 हजार से ज्यादा लोग जुटे थे।

कनाडा मेंप्रदर्शन के दौरान 23 हजार से ज्यादा लोग जुटे थे।

ब्रिटेन: एडवर्ड कॉल्सटन की मूर्ति तोड़ी, चर्चिल के स्टैच्यू पर नस्लभेदी लिखा

लंदन में प्रदर्शनकारियों ने 17वीं सदी के ब्रिटिश मानव तस्कर एडवर्ड कॉल्स्टन की मूर्ति तोड़कर नदी में फेंक दी। इससे पहले मूर्ति के गले पर ठीक वैसे ही पैर रखा, जैसे फ्लॉयड की गर्दन पर पुलिसवाले ने रखा था। यह मूर्ति ब्रिस्टल में लगाई गई थी। कॉल्स्टन 17वीं शताब्दी में अफ्रीकी लोगों को अमेरिका और दूसरे देशों में बेचता था।

हालांकि, बाद में वह भलाई के काम करने लगा, जिससे उसे सम्मानित दर्जा हासिल हुआ। वहीं सेंट्रल लंदन में लोगों ने समर्थन में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पार्लियामेंट स्क्वायर पर लगी विंस्टन चर्चिल की मूर्ति को नुकसान पहुंचाया। इस पर लिख दिया कि चर्चिल नस्लभेदी थे। चर्चिल विरोधी नारे भी लगाए गए।

इस दौरान लोगों की पुलिस से झड़प भी हो गई। इसके बाद वेस्टमिंस्टर में कर्फ्यू लागू कर दिया गया। पीएम जॉनसन ने प्रदर्शन के तरीके पर नाराजगी जाहिर की है।



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यह फोटो नॉर्थ कैरोलिना की है। पुलिस ने सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर अश्वेत लोगों के पैर धोए। इसका मकसद इंसानियत सबसे बड़ी है। यह संदेश देना था।


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