गोरखा कम्युनिटी इंडियन आर्मी जॉइन करने को लेकर क्यों उत्साहित हैं, ये जानने के लिए चीन नेपाल में फंडिंग कर रहा

नेपाल के गोरखा कम्युनिटी के युवाओं के इंडियन आर्मी में शामिल होने से चीन परेशान है। इस कारण चीन ने गोरखा युवाओं पर स्टडी के लिए काठमांडू के एक एनजीओ को 12.7 लाख नेपाली रुपए दिए हैं। चीन यह पता लगाना चाहता है कि गोरखा समुदाय के युवा इंडियन आर्मी जॉइन करने के लिए क्यों उत्साहित रहते हैं।

सूत्रों ने कहा- जून के पहले हफ्ते में नेपाल में चीन की राजदूत होउ यानकी ने नेपाली एनजीओ - चाइना स्टडी सेंटर (सीएससी) को फंडिंग किया। उन्हें कई चीजों पर स्टडी करने के लिए कहा गया है, जैसे नेपालियों के भारतीय सेना में शामिल होने के कारण, नेपाल के उन क्षेत्रों में जहां से इस तरह की भर्तियां की जा रही हैं और वहां के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, विदेशी सेना में शामिल होने में उनकी रुचि।

ब्रिटेश आर्मी में 4 गोरखा रेजिमेंट

इंडियन आर्मी में सात गोरखा रेजिमेंट हैं। इनमें लगभग 28,000 नेपाली नागरिक शामिल हैं। रेजीमेंटों की कुल 39 बटालियन हैं। कुल मिलाकर, 11 गोरखा रेजिमेंट थीं, जिनमें से चार स्वतंत्रता के बाद ब्रिटिश सेना में चली गईं।

भारत में पहली, तीसरी, चौथी, पांचवीं, आठवीं, नौवीं और 11वीं गोरखा रेजीमेंट हैं, जबकि ब्रिटिश आर्मी के पास दूसरी, 6वीं, 7वीं और 10वीं रेजीमेंट हैं। गोरखा समुदाय में मुख्य रूप से चार अलग-अलग जनजातियां शामिल हैं - खस (या चेत्री), गुरुंग, लिम्बुस और रायस।

1947 के त्रिपक्षीय समझौते का कोई मतलब नहीं: ओली

नेपाली गोरखों की इंडियन आर्मी में भर्ती 1947 में भारत, ब्रिटेन और नेपाल के बीच त्रिपक्षीय समझौते के बाद शुरू हुआ। लेकिन अब नेपाल का कहना है कि इस समझौते का कोई मतलब नहीं है। प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री थेरेसा मे के साथ मुलाकात के दौरान पहली बार इस मुद्दे को उठाया था।

नेपाल में भारत विरोधी कैंपेन

सूत्रों ने यह भी कहा कि नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी-बिप्लब (प्रतिबंधित अडरग्राउंड विद्रोही संगठन) ने नेपाल के युवाओं को गोरखा रेजीमेंट में शामिल होने से रोकने के लिए जन जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया है। सीपीएन-बिप्लब की कल्चरल विंग भारत विरोधी कैंपेन चला रहा है। इसके लिए नुक्कड़ नाटक, लोक नृत्य और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा ​​​को लेकर​​​​ विवाद

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा 8 मई को उत्तराखंड के धारचूला से लिपुलेख दर्रे को जोड़ने वाली 80 किमी लंबी सड़क के उद्घाटन के बाद भारत और नेपाल के बीच तनाव शुरू हो गए हैं। नेपाल ने सड़क के उद्घाटन का विरोध किया। यह दावा किया कि यह उसके क्षेत्र से गुजरता है। इसके कुछ दिनों बाद नेपाल ने एक नया नक्शा भी जारी किया, जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को नेपाल में दिखाया गया।

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इंडियन आर्मी में गोरखा सैनिकों की करीब 39 बटालियन हैं। (फाइल फोटो)


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