माइनस 80 डिग्री सेल्सियस में सुरक्षित रखना होगा कोरोना का टीका; ऐसे स्टोर बनाए जा रहे, जहां 600 फ्रीजर में वैक्सीन स्टोर की जाएगी

(डेविस गेल्स) कोरोना को हराने के लिए दुनिया में 170 टीकों पर काम चल रहा है। इनमें से 30 क्लीनिकल ट्रायल में हैं। वैक्सीन सफल होने के बाद उसे लोगों तक सुरक्षित पहुंचाना भी बड़ी चुनौती होगी। इसीलिए कोविड-19 के टीकों को माइनस 80 डिग्री सेल्सियस में स्टोर किया जाएगा, ताकि वे सुरक्षित रहें।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इतना ठंडा तापमान सिर्फ दक्षिणी ध्रुव का ही है। हालांकि, स्टोरेज कंपनियों की कोशिश है कि चाहे जैसी भी वैक्सीन बने, उसे लोगों को सही-सलामत पहुंचाएंगे। फिलहाल अमेरिकी फार्मा कंपनियां मॉडर्ना और फाइजर, जर्मन कंपनियां बायोएनटेक और क्योरवैक मैसेंजर आरएनए आधारित वैक्सीन पर काम कर रही हैं।

फुटबॉल के मैदान जितनी बड़ी स्टोरेज फैसिलिटी तैयार
उधर, अमेरिकी लॉजिस्टिक्स कंपनी यूपीएस ने नीदरलैंड्स में फुटबॉल के मैदान जितनी बड़ी स्टोरेज फैसिलिटी तैयार की है। यहां दो मीटर ऊंचे दर्जनों फ्रीजर रखे गए हैं, जो माइनस 80 डिग्री तक तापमान रख सकते हैं। कोविड-19 टीके यहीं रखे जाएंगे। टीके यहीं से लोगों तक पहुंचाए जाएंगे।

टीकों को यहां तक पहुंचाने के लिए स्पेशल शीशियां तैयार की जा रही हैं, जो इतनी ठंडक को बर्दाश्त कर सकें। कोरोना के टीके लोगों तक पहुंचाने के लिए विमान, ट्रकों और गोदामों को भी डीप फ्रीजर के साथ तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

एक फ्रीजर में वैक्सीन के 48,000 डोज रखे जा सकते हैं
यूपीएस हेल्थकेयर के प्रमुख अनूक हेसेन बताते हैं, ‘जर्मनी और अमेरिका में यूपीएस के एयर कार्गो के पास ही ऐसे सेंटर बनाए जा रहे हैं। जहां करीब 600 फ्रीजर रखे जाएंगे। ऐसे एक फ्रीजर में वैक्सीन के 48,000 डोज रखे जा सकते हैं। इन फ्रीजर फार्मों में कोई बिना पीपीई किट पहने काम नहीं कर सकता। कर्मचारियों को सही गियर, दस्ताने, चश्मे वगैरह मुहैया कराए जाएंगे। इनके बिना कोई इतने ठंडे तापमान में चल नहीं पाएगा।’

96 घंटे तक इंसुलेटेड डिब्बों में बर्फ के साथ रखे जा सकेंगे
हेसेन बताते हैं, ‘टीकों की मांग आने पर उन्हें फिर इंसुलेटेड डिब्बों में सूखी बर्फ के साथ पैक किया जाएगा। इन डिब्बों में टीका 96 घंटों तक सही तापमान पर रखा जा सकता है। जिन कमरों में इन्हें पैक किया जाएगा, वहां का तापमान माइनस 20 डिग्री तक रखा जा सकता है। फिर पैक किए गए टीकों के डिब्बों को विमानों से दुनिया के किसी भी छोर तक पहुंचाया जाएगा।’

(द न्यूयॉर्क टाइम्स से विशेष अनुबंध के तहत)



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कोविड-19 की वैक्सीन के ट्रायल सफल होने के बाद उन्हें लोगों तक सुरक्षित पहुंचाना भी बड़ी चुनौती होगी।


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