6 अक्टूबर को क्वाड देशों की बैठक, इंडो-पैसेफिक रीजन में चीन की आक्रामकता पर लगाम लगाने पर रहेगा फोकस

इंडो-पैसिफिक रीजन में चीन की अवैध गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं। इस बीच भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका (क्वाड देशों) के विदेश मंत्रियों के बीच 6 अक्टूबर को टोक्यो में बैठक होने वाली है। यह बैठक चीन की हरकतों पर लगाम लगाए जाने पर केंद्रित होगी। भारत की ओर से इसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल होंगे।

यह बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब चीन इंडो-पैसिफिक और यूरेशियन रीजन में अपना आर्थिक हित साधने और सैन्य क्षमता बढ़ाने में लगा है। हाल के महीनों में देखें तो अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों का चीन के प्रति रवैया काफी सख्त हुआ है। इसका एक मुख्य कारण कोरोना महामारी भी है, जिसकी शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई थी।

चीन हमारे लोगों के लिए खतरा: अमेरिका

23 जुलाई को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने चीन के साथ यूएस पॉलिसी को खत्म करने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा था कि दुनिया के फ्रीडम लवर कंट्री को चीन को बदलने के लिए प्रेरित करना चाहिए, जैसे कि राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन चाहते थे। क्योंकि चीन की हरकतों से हमारे लोगों और समृद्धि को खतरा है।

16 सितंबर को अमेरिकी सांसद टॉम टिफनी ने वन चाइना पॉलिसी को खत्म करने के लिए और ताइवान के साथ संबंधों को फिर से शुरू करने के लिए संसद में बिल पेश किया था। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर की 1979 में ताइवान के साथ राजनयिक संबंध खत्म किए जाने की भी आलोचना की थी।

भारत-चीन सीमा विवाद

15 जून को गलवान घाटी में चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय जवानों पर हमला किए जाने के बाद से ही भारत और चीन में तनाव जारी है। इस हिंसक संघर्ष में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। दोनों देशों के बीच कई राउंड मिलिट्री लेवल की बातचीत हो चुकी है, जो बेनतीजा रही है।

चीन के प्रति जापान का रवैया भी सख्त

हाल के हफ्तों में शिंजो आबे के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफे के बाद, जापान ने चीन के प्रति बेहद सख्त रुख अपना लिया है। पद से हटने के बाद आबे ने हाल ही में जापान की जनता को चीन के खिलाफ एकजुट करने के लिए यासुकूनी स्मारक का दौरा किया था। कहा जाता है कि चीन के विरोध के डर से जापान के पूर्व पीएम यहां आने से कतराते रहे हैं।

नए पीएम योशिहिदे सुगा के मंत्रिमंडल में शामिल और रक्षा मंत्री अबे के भाई नोबुओ किशी ने कहा कि चीन का तेजी से सैन्य निर्माण करना एक गंभीर चिंता का विषय है। उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने से चीन नाराज है, क्योंकि किशी को ताइवान के साथ गहरे संबंधों के लिए जाना जाता है।

क्वाड क्या है?
क्वाड को क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग के नाम से भी जाना जाता है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ रही सैन्य गतिविधियों पर चिंता जताते हुए अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने मिलकर ‘क्वाड’ (4 देशों का संगठन) बनाया था। 2007 में जापान के पीएम शिंजो आबे ने क्वाड का प्रस्ताव रखा था। इसके सामने आने के बाद रूस और चीन ने विरोध भी जताया था। 2008 में ऑस्ट्रेलिया ग्रुप से बाहर हो गया था। हालांकि, बाद में वह फिर शामिल हो गया था।



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चीन इंडो-पैसेफिक और यूरेशियन रीजन में अपना आर्थिक हित साधने और सैन्य क्षमता बढ़ाने में लगा है। -फाइल फोटो


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