जाधव को सजा-ए-मौत की समीक्षा होगी, असेंबली की स्थायी समिति ने बिल को मंजूरी दी

पाकिस्तान नेशनल असेंबली की कानून और न्याय संबंधी स्थायी समिति ने कुलभूषण जाधव को मिली मौत की सजा की समीक्षा करने वाले बिल को मंजूरी दे दी है। पाकिस्तानी जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को वहां के मिलिट्री कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है।

द इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (रिव्यू एंड रिकंसीडरेशन) शीर्षक वाले इस प्रस्ताव पर विपक्ष के विरोध के बावजूद बुधवार को कमेटी ने चर्चा की और उसे पास कर दिया। बहस में हिस्सा लेते हुए संघीय कानून और न्याय मंत्री फारग नसीम ने कहा कि बिल को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के निर्देशों के मुताबिक पेश किया गया है। उन्होंने चेताया कि अगर संसद ने इसे मंजूरी नहीं दी तो पाकिस्तान को प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

विपक्षी पार्टियों ने किया बिल का विरोध

स्थानीय मीडिया के मुताबिक, समिति में शामिल विपक्षी पार्टियों मुस्लिम लीग-नवाज, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के सदस्यों ने इस बिल को खारिज करने की गुजारिश की। सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) से जुड़ी सदस्य फातिना ने मतदान के बाद इस मामले को निपटाने का फैसला किया। उन्होंने मतदान से पहले 2 PTI सदस्यों को हॉल से बाहर जाने से रोकने की कोशिश भी की। रिपोर्ट में कहा गया है कि 8 सदस्यों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया, जबकि 5 ने इसका विरोध किया।

मंत्री बोले, प्रतिबंधों के डर से लाए बिल

विपक्ष के विरोध के बीच कानून मंत्री ने कहा कि उनके मंत्रालय ने पाकिस्तान के खिलाफ अवमानना याचिका दायर करने के भारतीय कदम को रोकने के लिए यह प्रस्ताव तैयार किया था। अगर यह मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पास भेजा जाता है तो पाकिस्तान को प्रतिबंधों का सामना कर सकता है।

जाधव को जासूसी के आरोप में सुनाई गई थी सजा

50 साल के रिटायर्ड भारतीय नौसेना अधिकारी जाधव को अप्रैल, 2017 में जासूसी और आतंकवाद फैलाने के आरोप में पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। जाधव तक राजनयिक पहुंच देने से पाकिस्तान के इनकार और मौत की सजा के खिलाफ भारत ने अंतरराष्ट्रीय अदालत​​​​​​ में अपील की थी। हेग स्थित ICJ ने जुलाई, 2019 में फैसला सुनाया कि पाकिस्तान को जाधव की सजा पर पुनर्विचार करना चाहिए। साथ ही बिना देर किए भारत के राजनयिकों को उससे मिलने देना चाहिए।

भारत ने कहा था, इंटरनेशनल कोर्ट दे आदेश

इससे पहले पाकिस्तान ने इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष सुनवाई के लिए जाधव को एक भारतीय वकील देने की मांग को खारिज कर दिया था। इस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने 8 अक्टूबर को कहा था कि जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय कोर्ट की तरफ से आदेश दिए जाने की जरूरत है।

जाधव मामले से जुड़े तथ्य

  • पाकिस्तान का दावा है कि कुलभूषण जाधव भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के कर्मचारी हैं। भारत ने जाधव की भारतीय नागरिकता और पूर्व नौसेना अधिकारी होने की ही पुष्टि की है।
  • 10 अप्रैल 2017 में पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने जाधव को जासूसी के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी। 10 मई, 2017 को इंटरनेशनल कोर्ट ने जाधव की फांसी पर रोक लगा दी। भारत ने मौत की सजा के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी।
  • 17 जुलाई 2019 को इंटरनेशनल कोर्ट ने जाधव को दी गई फांसी की सजा पर रोक जारी रखते हुए पाकिस्तान से इस पर फिर से विचार करने को कहा था।


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50 साल के रिटायर्ड भारतीय नौसेना अधिकारी जाधव को अप्रैल, 2017 में जासूसी और आतंकवाद फैलाने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। - फाइल फोटो


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