टाउन हॉल में हमेशा की तरह आक्रामक दिखे ट्रम्प; बाइडेन ने अपनी बात मजबूती और फैक्ट्स के साथ रखी

दूसरी प्रेसिडेंशियल डिबेट रद्द हुई तो अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दोनों उम्मीदवार टाउन हॉल के जरिए वोटर्स रूबरू हुए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हमेशा की तरह आक्रामक तरीके से विरोधाभासी और गलत तर्क देते दिखे। उनकी तुलना में डेमोक्रेट कैंडिडेट जो बाइडेन का रवैया शांत था। उनकी बातें और तर्क सच के ज्यादा करीब थे। ट्रम्प ने कई सवालों के जवाब ही नहीं दिए। कुछ से वे बचते नजर आए। ये भी नहीं बताया कि 29 सितंबर को हुई पहली प्रेसिडेंशियल डिबेट से पहले उनकी कोरोना टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव थी या नहीं। हम यहां दोनों कैंडिडेट्स द्वारा कही गई बातों की सच्चाई जानने की कोशिश कर रहे हैं।

ट्रम्प : कोरोनावायरस पर काबू पाने के करीब हैं हम
इसका सच : यही सही नहीं है। न्यूयॉर्क टाइम्स का डेटा भी इसकी पुष्टि करता है। पिछले हफ्ते हर दिन करीब 53 हजार 120 नए मामले रोज सामने आए। यह दो हफ्ते पहले की तुलना में 23% ज्यादा है।

ट्रम्प : अब्राहम लिंकन के बाद अफ्रीकी-अमेरिकियों के लिए सबसे ज्यादा काम करने वाला राष्ट्रपति हूं।
इसका सच : ट्रम्प का दावा सच नहीं है। इतिहासकार मानते हैं कि इस मामले में प्रेसिडेंट लिंडन जॉनसन सबसे आगे हैं। उन्होंने वोटिंग राइट्स एक्ट, सिविल राइट एक्ट और हाउसिंग एक्ट जैसी कानूनों के जरिए अफ्रीकी-अमेरिकियों को सुविधाएं और हक दिए। ट्रम्प इस मामले में तीसरे स्थान पर हैं।

ट्रम्प : मास्क पहनने वाले लोग ज्यादा संक्रमित हो रहे हैं।
इसका सच : यह सच नहीं है। दरअसल, 10 सितंबर को सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की एक रिपोर्ट वायरल हुई थी। बाद में सीडीसी ने ट्विटर पर बयान जारी करके इसका खंडन किया था। इसमें कहा गया था कि बिना मास्क के सोशल एक्टिविटीज में हिस्सा लेना खतरनाक है। सीडीसी ने कहा था कि उसके बयान को सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने गलत तरीके से पेश किया है।

ट्रम्प : हमने अश्वेतों के कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज को ज्यादा फंडिंग की।
इसका सच : ट्रम्प बढ़ाचढ़ाकर दावा कर रहे हैं, क्योंकि इसका क्रेडिट लेना चाहते हैं। पारंपरिक तौर पर अश्वेतों के कॉलेज और यूनवर्सिटीज का फंड सितंबर में खत्म हो गया था। रिपब्लिकन्स और डेमोक्रेट्स ने मिलकर फंडिंग फिर शुरू कराने के लिए समझौता किया। अब यह 10 साल जारी रहेगी। ट्रम्प ने इसे कानून के तौर पर मंजूरी दे दी है।

ट्रम्प : हमने अब तक के इतिहास में सबसे ज्यादा नौकरियां दीं।
इसका सच : ट्रम्प जो आंकड़ा बता रहे हैं, वो दरअसल महामारी के शुरू होने के पहले का है। फरवरी के ही आंकड़े उठाकर देख लें तो पता लगता है कि उस वक्त 152.5 मिलियन नॉनफॉर्म नौकरियां देश में थीं। यह वो दौर था जबकि महामारी ने अमेरिका में पैर नहीं पसारे थे। या यूं कहें कि इसका असर नहीं के बराबर था।

ट्रम्प : मैंने श्वेतों को बेहतर नहीं बताया। पहली डिबेट में भी इसकी पुष्टि की थी।
इसका सच : ट्रम्प पूरी तरह सही नहीं हैं। पहली प्रेसिडेंशियल डिबेट के दौरान उन्होंने सिर्फ यह कहा था कि वे श्वेतों को श्रेष्ठ बताने वाले संगठनों को लेकर गंभीर हैं। उन्होंने वामपंथी विचारधारा को हिंसा के लिए दोषी ठहराया था। बाइडेन और मॉडरेटर क्रिस वॉलेस चाहते थे कि वे इन श्वेत संगठनों की निंदा करें, ट्रम्प ने ऐसा नहीं किया।

बाइडेन : टाउन हॉल में आने से पहले टेस्ट कराया। मैं रोज कोरोना टेस्ट कराता हूं।
इसका सच : बाइडेन के कैम्पेन ने टाउन हॉल के पहले जारी बयान में कहा था कि उन्होंने बुधवार और गुरुवार को टेस्ट कराया था। दोनों की रिपोर्ट निगेटिव थी। लेकिन, यह दावा गलत है कि वे बाइडेन रोज टेस्ट कराते हैं। उनकी टीम ने ऐसा कभी नहीं कहा।

बाइडेन : ट्रम्प के दौर में अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़ी। हमारे वक्त यह कम थी।
इसका सच : आंकड़े बताते हैं कि बाइडेन का दावा बिल्कुल गलत है। ओबामा के दौर में जब बाइडेन उप राष्ट्रपति थे, तब अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की संख्या करीब 10 हजार थी। ट्रम्प ने 2017 में इनकी संख्या पांच हजार कर दी। अगले साल की शुरुआत में यह ढाई हजार करने का वादा है।



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