दिसंबर से जनवरी के बीच भारत में तूफान और तेज सर्दी तो चीन में हो सकती है अतिवृष्टि

वर्ष 2020 में अगर अखबारों की सुर्खियों में कोरोना महामारी नहीं छाई होती तो संभवत: मौसम के अतिरेक से जुड़ी घटनाओं को यह जगह मिलती। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में जंगलों की आग हो या औसत तापमान लगातार बढ़ने से रशिया के पर्माफ्रॉस्ट का पिघलना या फिर एशिया और पैसिफिक द्वीपों के कई हिस्सों में अतिवृष्टि, बाढ़ या तूफान...यह सभी मौसम के बिगड़े मिजाज का ही नमूना है। अंतरराष्ट्रीय मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि साल बीतते-बीतते भी दक्षिण-पूर्व एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप को अभी और मौसम से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

अभी हिंद महासागर में बन रही ला नीना परिस्थितियों के कारण भारत में तूफान-सर्दी तो चीन में अतिवृष्टि हो सकती है वहीं, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में सूखे जैसी स्थिति भी बन सकती है। टोक्यो बेस्ड वेदर मैप कंपनी में फोरकास्टर व मौसम से जुड़ी आपदाओं के प्रबंधन की विशेषज्ञ मासामी यामादा का मानना है कि आने वाले महीनों में दक्षिण एशिया में ला नीना की वजह से कुछ मुश्किलें आ सकती हैं।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष गर्मियों में हिंद महासागार डाइपोल की घटना हुई थी। इसमें महासागर के पूर्वी व पश्चिमी हिस्से के तापमान में अचानक बदलाव आ जाते हैं। इसे इंडियन नीनो भी कहा जाता है। इसकी वजह से महासागर के पश्चिमी हिस्से में गर्मी से वर्षा तेज हो जाती है और उत्तरी हिस्से में तापमान गिरने से ठंड बढ़ती है। और साथ ही सटे हुए इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में सूखे की स्थिति बन जाती है। इसी वजह से इस साल चीन के यांग्त्जी बेसिन में अतिवृष्टि और बाढ़ की स्थिति बनी। बहुत संभव है कि दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्से में तेज वर्षा हो। मध्य वियतनाम और फिलिपींस में पहले ही तेज वर्षा और समुद्री तूफानों से काफी नुकसान हो चुका है।

अभी पूरे क्षेत्र में कनवेक्टिव एक्टिविटी बढ़ने से रिकॉर्ड बारिश देखने को मिल सकती है। बारिश के साथ ही ला नीना इफेक्ट से तापमान गिरने की भी संभावना बढ़ जाती है। भारतीय उपमहाद्वीप को इन दोनों का सामना करना पड़ सकता है। तमिलनाडु तट से टकराया निवार तूफान भी मौसम के इस मिजाज की तस्दीक करता है।

हालांकि लॉन्ग टर्म फोरकास्ट कहता है कि अगले साल की शुरुआत में ला नीना परिस्थितियां धीमी पड़ती जाएंगी और अगले बसंत तक भारत समेत पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में मौसम अपने सामान्य पैटर्न पर लौट आएगा।

हालांकि यामादा कहती हैं कि पूरी दुनिया में मौसम बिगड़ रहा है, यह हमें मानना होगा। चाहे समुद्री तूफान हों, भारी बर्फबारी-बारिश या बहुत ज्यादा गर्मी, यह सभी परिस्थितियां ला नीना या इंडियन ओशन डाइपोल जैसी घटनाओं के कारण हो रही हैं। इन घटनाओं की पुनरावृत्ति तेज हो गई है। ऐसे में मानव जीवन को प्रभावित करने वाली मौसम की परिस्थितियां अभी और नाटकीय मोड़ लेंगी।

50 वर्ष में मौसम से जुड़ी 11000 आपदाएं

वर्ल्ड मीटरोलॉजिकल एजेंसी पिछले 50 वर्षों में 11 हजार से ज्यादा आपदाओं का संबंध मौसम से रहा है। इन आपदाओं में 20 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि 3.6 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति का नुकसान हुआ है।



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घास पर जमीं ओस की बूंदे (फोटो राजस्थान के कोटा शहर की है)


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