कमला हैरिस ने हमेशा अपने पूर्वजों का जिक्र किया; अश्वेतों और बाहरी लोगों पर हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई

(लीसी रेरर, सिडनी एम्बर) अमेरिका की पहली महिला उपराष्ट्रपति भारतीय मूल की कमला हैरिस ने अश्वेतों और बाहरी लोगों के अधिकारों की आवाज हमेशा उठाई है। उन्हें बचपन से सिखाया गया कि अश्वेतों के लिए न्याय पाने का रास्ता बहुत लंबा है।

वे चुनाव अभियान के दौरान अक्सर अपने पूर्वजों, माता-पिता और अमेरिका में बाहर से आकर बसे लोगों के नागरिक अधिकारों की चर्चा करती रहीं। उन्होंने, मतदान से कुछ दिन पहले फोर्ट विथ, टेक्सास में कहा, कई बार लगता है कि हम उस कमरे में अकेले हैं। लेकिन, हम जानते हैं कि अकेले नहीं हैं। हम सब साथ हैं।
रंग और नस्ल के आधार पर विभाजित देश में 56 साल की कमला का उपराष्ट्रपति बनना बहुत महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। वे अब नस्ली तौर पर अधिक विविध हो रहे देश के भविष्य का सूचक हैं। जीत के बाद उन्होंने पहले भाषण में अपनी मां और उन महिलाओं को याद किया जिन्होंने इस अवसर के लिए रास्ता बनाया है। उनकी मां भारतीय और पिता जमैका के हैं।

स्तन कैंसर की शोधकर्ता उनकी मां का 2009 में निधन हो गया। कमला बहुत कम आयु से ओकलैंड और बर्कले में रंगभेद से जुड़े मसले उठाती रहीं। उन्होंने, 2016 में पहली बार सीनेटर चुने जाने के बाद सीनेट की सुनवाई में आक्रामक लहजे से पहचान बनाई। माट्रियल में कई साल रहने के बाद कमला ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। इसके बाद घरेलू हिंसा और बाल शोषण के मामलों में प्रोसीक्यूटर के बतौर करिअर शुरू किया।
कमला हैरिस ने डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रारंभिक चुनावों से अश्वेतों की आवाज उठाई। ओकलैंड में उनकी एक सभा में बीस हजार लोगों की भीड़ थी। इसके साथ वे राष्ट्रपति प्रत्याशी की दौड़ में आगे आ गई थीं। लेकिन, बाद में ज्यादा समर्थन मिलने के कारण वे होड़ से बाहर हट गईं।

वे अपनी नीतियां और एजेंडा पेश करने में विफल रहीं। उस समय बाइडेन पर अपने तीखे हमलों को भी स्पष्ट नहीं कर पाई थी। वैचारिक दृढ़ता के अभाव ने उनके लिए उपराष्ट्रपति प्रत्याशी बनने का रास्ता खोला। उपराष्ट्रपति से राष्ट्रपति के अनुरूप चलने की अपेक्षा होती है।
बाइडेन द्वारा उन्हें उपराष्ट्रपति प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद कमला ने चुनाव अभियान के दौरान अश्वेतों और इमिग्रांट्स को पार्टी की ओर आकर्षित करने के लगातार प्रयास किए। कई लोग कहते थे, कमला हैरिस की उम्मीदवारी उन्हें अपने राजनीतिक प्रतिनिधित्व का आभास कराती है। उनके खिलाफ रिपब्लिकन समर्थकों ने लगातार नस्लवादी हमले किए।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प उनके नाम का गलत उच्चारण करते थे। उन्होंने, रिपब्लिकनों के हमलों का स्वाभाविक रूप से सामना किया। हैरिस की मित्र सीनेटर कोरी बुकर कहती हैं, कमला को अहसास था कि अश्वेत महिला को लोग आसानी से स्वीकार नहीं करेंगे। कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक सांसद बारबरा ली कहती हैं, मुझे हमेशा विश्वास था कि व्हाइट हाउस में किसी अश्वेत महिला को जगह मिलेगी।
कमला हैरिस ने स्पष्ट तौर से स्वयं को राष्ट्रपति के उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित कर लिया है। किसी अन्य उपराष्ट्रपति की तुलना में उनकी संभावनाएं अधिक उजली लगती हैं। बुकर कहती हैं, निर्वाचित राष्ट्रपति बाइडेन इस बात को समझते हैं। सांसद प्रमिला जयपाल का कहना है, हैरिस का उपराष्ट्रपति बनना दक्षिण एशियाइयों के लिए गौरव की बात है।

वे कल्पना करेंगे कि अमेरिका के सार्वजनिक जीवन में किस ऊंचाई तक पहुंचा जा सकता है। जयपाल ने अगस्त में लॉसएंजिलिस टाइम्स में एक लेख लिखकर नई उपराष्ट्रपति से अपने स्वयं के संबंधों का जिक्र किया है। प्रमिला दक्षिण भारत की हैं। उन्होंने कहा, हैरिस जानती हैं कि बाहरी लोगों की संतान और अश्वेत होने का क्या अर्थ है।

वे घरेलू कामगारों और मुस्लिम इमिग्रांट्स की मदद करेंगी। राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय अश्वेत महिलाएं हैरिस को सहयोगी और अपना नेता मानती हैं। सांसद लॉरेन अंडरवुड बताती हैं, जब वे शिकागो से कांग्रेस का चुनाव लड़ रही थीं तब हैरिस ने आकर उनका हौसला बढ़ाया था।

बाइडेन ने कैसे राष्ट्रपति चुनाव में विजय हासिल की

  • निर्वाचित राष्ट्रपति जोसफ बाइडेन ने एक विनम्र और परंपरागत राजनेता के रूप में अभियान चलाया।
  • वायरस महामारी से निपटने में राष्ट्रपति ट्रम्प की विफलता और उग्र व्यवहार को प्रचार की मुख्य थीम बनाया। उन्होंने बाकी सभी मुद्दों को किनारे रखा।
  • उनका अभियान जोश-खरोश और शोर-शराबे से दूर था। उन्होंने अनुशासन और संयम का परिचय दिया। देश की आत्मा और सम्मान की रक्षा के लिए लड़ने वाले योद्धा का आभास कराया।
  • कुछ डेमोक्रेट नेता कई महत्वपूर्ण राज्यों में सघन अभियान पर जोर दे रहे थे। लेकिन, बाइडेन ने पेनसिल्वानिया, विस्कांसिन, मिशिगन, ओहायो, मिनेसोटा, इलिनॉय, इंडियाना पर अधिक ध्यान दिया।
  • बाइडेन को विश्वास था कि वोटर के लिए व्हाइट हाउस की ट्रम्प में मौजूदगी से बड़ा कोई मुद्दा नहीं है। उन्होंने, ट्रम्प से अलग हटकर अपनी इमेज पेश की।
  • बाइडेन ने देश का व्यापक दौरा नहीं किया। वे इस तरह वायरस से बचाव के लिए भीड़ से बचने का संदेश देते रहे। यह ट्रम्प से विपरीत था।

© The New York Times



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कमला बहुत कम आयु से ओकलैंड और बर्कले में रंगभेद से जुड़े मसले उठाती रहीं।


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