सुप्रीम कोर्ट ने अफसरों से कहा- भीड़ ने जिस मंदिर को तोड़ा था, उसे दो हफ्ते में दोबारा बनवाओ

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के करक जिले में जलाए गए मंदिर को दोबारा बनाने का आदेश दिया है। 30 दिसंबर को हिंसक भीड़ ने इस मंदिर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी थी। इस मामले में मंगलवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि वे दो हफ्ते के अंदर मंदिर का काम शुरू कराएं। साथ ही एवेक्यू ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) से सभी मंदिरों का ब्योरा भी मांगा।

लोकल मीडिया के मुताबिक, पाकिस्तान के चीफ जस्टिस गुलजार अहमद ने इस मामले का खुद संज्ञान लेते हुए सवाल उठाया कि कैसे पुलिस ने भीड़ को मंदिर परिसर में घुसने दिया। चीफ जस्टिस ने कहा कि मंदिर को दोबारा बनाने का खर्च उन्हीं लोगों से वसूला जाए, जो इस घटना के जिम्मेदार हैं। इसके बाद सुनवाई दो हफ्ते के लिए टाल दी गई।

100 से ज्यादा लोगों ने हमला किया था

बीते बुधवार को मौलवियों के अगुवाई में 100 से ज्यादा लोगों की भीड़ ने यह मंदिर तोड़ दिया था। सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक वीडियो क्लिप में दिखाई दिया था कि भीड़ ने मंदिर की दीवारों और छत को तोड़ दिया। इस घटना की देश और दुनिया में आलोचना हुई थी। बताया जाता है कि एक स्थानीय मौलवी ने भीड़ को उकसाया था। ये सभी लोग पाकिस्तान की सुन्नी देवबंदी राजनीतिक पार्टी जमीयत उलेमा-ए इस्लाम-फजल की रैली में शामिल थे। इस रैली में मंच से भड़काऊ भाषण दिए गए थे। इसके बाद भीड़ ने मंदिर पर हमला कर आग लगा दी।

जर्नलिस्ट ने शेयर किया था वीडियो

पाकिस्तान के एक जर्नलिस्ट के मुताबिक, हिंदुओं ने मंदिर का विस्तार करने के लिए प्रशासन से मंजूरी ले ली थी, लेकिन स्थानीय लोगों ने भीड़ जुटाई और मंदिर को तोड़ डाला। यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि लोकल एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिस ने इस दौरान कोई कार्रवाई नहीं की और चुपचाप खड़ी देखती रही।

पुलिस तमाशा देखती रही

लंदन बेस्ड ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह नया पाकिस्तान है। करक में आज एक हिंदु मंदिर को बर्बाद किया। इस इलाके में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी की हुकूमत है। पुलिस ने भी भीड़ को रोकने की कोशिश नहीं की, क्योंकि वे धार्मिक नारे लगा रहे थे। घटना की जितनी निंदा की जाए, वह कम है।

कोर्ट के आदेश पर मंदिर का जीर्णोद्धार चल रहा था

करक जिले के तेरी गांव के मंदिर का 2015 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक विस्तार किया जा रहा था। इस मंदिर को इससे पहले 1997 में एक स्थानीय मुफ्ती ने नष्ट कर दिया था और इस पर अवैध कब्जा कर लिया था।



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यह फोटो घटना के वायरल वीडियो से ली गई है। इसमें भीड़ मंदिर में आग लगाती दिख रही है।-फाइल फोटो


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